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Jammu News: फुटपाथ पर भक्त, जलभराव में बहे प्रबंध
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। अमरनाथ यात्रियों के लिए जिला प्रशासन हर सुविधा देने का दावा कर रहा है। मगर हकीकत विपरित है। बारिश के कारण बुधवार को सरस्वती धाम के बाहर सड़क पर पानी जमा हो गया। टोकन लेने पहुंचे भक्त फुटपाथ पर चढ़ गए। करीब डेढ़ फुट तक जलभराव होने से दिक्कतें बढ़ गईं। यहां तक कि देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए सड़क किनारे टेंट का इंतजाम नहीं किया गया। इस वजह से भक्त भीग गए और कई बीमार हो गए।
यात्रियों के अनुसार मंगलवार रात एक बजे के बाद लाइन में लगे थे और करीब ढाई बजे बारिश शुरू हो गई। बचने के लिए आसपास कोई प्रबंध नहीं था, न ही ऐसी सुविधा थी कि बैठ जाएं। इस वजह से परेशान हो गए और कुछ लोग बीमार पड़ गए। महिलाओं ने कहा -आला अधिकारियों से परिसर में टेंट के नीचे बैठने की अनुमति मांगी थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। वहीं, इस बारे में जब डीसी अवनी लवासा से फोन पर बात करने का प्रयास किया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
मजबूरी ऐसी... पानी में रहे खड़े
उज्जैन वासी मीरा ने बताया कि रात दो बजे से लाइन में लगे थे। यहां पर पानी टांगों तक भर गया, बारिश बंद होने तक सभी लोग पानी में खड़े रहे। यहां तक कि धर्मशाला या होटल में रूम तक नहीं मिला। इस वजह से समस्याओं का सामना करना पड़ा। उनके साथ और महिलाएं हैं व एक बच्चा है। प्रशासन की तरफ से किसी की सुध नहीं ली गई।
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अंदर बैठने की अनुमति तक नहीं मिली
भोपाल की विमला के अनुसार पंजीकरण के लिए पानी में भीगते रहे। सुबह से बारिश में खड़ी कई महिलाएं बीमार हो गईं। आला अधिकारियों से टेंट में बैठने की अनुमति मांगी, पर बारिश में ही खड़े होने को मजूबर होना पड़ा। ऐसा लगता है कि यहां समस्या का समाधान किसी के पास नहीं है।
रेनकोट के लिए रातभर संघर्ष, सुबह मिला तो वह भी महंगा
महाराष्ट्र के ईश्वर ने बताया कि बाबा के दरबार जाने को सुबह 6 बजे से लाइन में लगे हैं, लेकिन इतनी समस्या आएगी यह सोचा नहीं था। खाने को तो है लेकिन खड़े और बैठने के लिए प्रबंध नहीं है। इसी तरह पंडित बन्नी ने बताया-रेनकोट लेने के लिए रात में इध-उधर भागते रहे। सुबह दुकान खुलने के बाद रेनकोट महंगे मिले। एक रेनकोट 300 रुपये से ज्यादा का मिला।
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जम्मू। अमरनाथ यात्रियों के लिए जिला प्रशासन हर सुविधा देने का दावा कर रहा है। मगर हकीकत विपरित है। बारिश के कारण बुधवार को सरस्वती धाम के बाहर सड़क पर पानी जमा हो गया। टोकन लेने पहुंचे भक्त फुटपाथ पर चढ़ गए। करीब डेढ़ फुट तक जलभराव होने से दिक्कतें बढ़ गईं। यहां तक कि देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए सड़क किनारे टेंट का इंतजाम नहीं किया गया। इस वजह से भक्त भीग गए और कई बीमार हो गए।
यात्रियों के अनुसार मंगलवार रात एक बजे के बाद लाइन में लगे थे और करीब ढाई बजे बारिश शुरू हो गई। बचने के लिए आसपास कोई प्रबंध नहीं था, न ही ऐसी सुविधा थी कि बैठ जाएं। इस वजह से परेशान हो गए और कुछ लोग बीमार पड़ गए। महिलाओं ने कहा -आला अधिकारियों से परिसर में टेंट के नीचे बैठने की अनुमति मांगी थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। वहीं, इस बारे में जब डीसी अवनी लवासा से फोन पर बात करने का प्रयास किया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
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मजबूरी ऐसी... पानी में रहे खड़े
उज्जैन वासी मीरा ने बताया कि रात दो बजे से लाइन में लगे थे। यहां पर पानी टांगों तक भर गया, बारिश बंद होने तक सभी लोग पानी में खड़े रहे। यहां तक कि धर्मशाला या होटल में रूम तक नहीं मिला। इस वजह से समस्याओं का सामना करना पड़ा। उनके साथ और महिलाएं हैं व एक बच्चा है। प्रशासन की तरफ से किसी की सुध नहीं ली गई।
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अंदर बैठने की अनुमति तक नहीं मिली
भोपाल की विमला के अनुसार पंजीकरण के लिए पानी में भीगते रहे। सुबह से बारिश में खड़ी कई महिलाएं बीमार हो गईं। आला अधिकारियों से टेंट में बैठने की अनुमति मांगी, पर बारिश में ही खड़े होने को मजूबर होना पड़ा। ऐसा लगता है कि यहां समस्या का समाधान किसी के पास नहीं है।
रेनकोट के लिए रातभर संघर्ष, सुबह मिला तो वह भी महंगा
महाराष्ट्र के ईश्वर ने बताया कि बाबा के दरबार जाने को सुबह 6 बजे से लाइन में लगे हैं, लेकिन इतनी समस्या आएगी यह सोचा नहीं था। खाने को तो है लेकिन खड़े और बैठने के लिए प्रबंध नहीं है। इसी तरह पंडित बन्नी ने बताया-रेनकोट लेने के लिए रात में इध-उधर भागते रहे। सुबह दुकान खुलने के बाद रेनकोट महंगे मिले। एक रेनकोट 300 रुपये से ज्यादा का मिला।