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जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन बिल 2019 को चुनौती देने वाली याचिका रद्द, न्यायालय ने कही यह बात

Thu, 12 Sep 2019 11:13 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 12 Sep 2019 11:13 AM IST
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Petition challenging J&K Reorganization Act 2019 has been canceled
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : डेमो

जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन बिल 2019 को हाईकोर्ट में चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अब्दुल गनी भट्ट ने इस एक्ट को चुनौती दी थी। बुधवार को जस्टिस अली मोहम्मद मागरे ने इस पर सुनवाई की। जज ने कहा कि इस मामले को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं। अक्टूबर में इन पर सुनवाई होनी है। तब तक इंतजार किया जाना चाहिए।

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कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से याचिकाएं दायर हैं। जिस पर सुनवाई होनी है। यदि अपीलकर्ता चाहें तो वे सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर करने को स्वतंत्र हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि उनके पास दो ही विकल्प बचते हैं। पहला यह कि इस याचिका को स्थगित कर अंतिम फैसले का इंतजार किया जाए। दूसरा यह कि इस रिट याचिका का निपटारा कर दिया जाए।
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इससे पहले जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अपीलकर्ता ने अपनी याचिका में देश की संसद में अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने सहित अन्य फैसलों को रद्द करने की मांग रखी थी।
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कश्मीर में पाबंदियां हटाने की मांग भी रखी गई थी। याचिका में कहा गया कि केंद्र राज्य के आंतरिक मामले में दखल न करे। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद संसद में पारित एक्ट और कानून से संबंधित तमाम फैसलों को निरस्त करने की मांग की गई। याचिका में बताया गया था कि कश्मीर में कर्फ्यू लगाकर लोगों की आजादी छीन ली गई है। वहां सब कुछ प्रभावित है।

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