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यहां कानून के घर देर भी अंधेर भी, पढ़ें खबर

Fri, 03 Oct 2014 12:42 PM IST
Updated Fri, 03 Oct 2014 12:42 PM IST
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Permission to appeal after 18 years in murder

हाईकोर्ट के जस्टिस वीरेंद्र सिंह और जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अत्तर की खंडपीठ ने 18 साल बाद हत्या के मामले में एक आपराधिक अपील का फैसला करते हुए आंशिक रूप से अपील को अनुमति दे दी।

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अपील के अनुसार सरायन सिंह, विजय सिंह, जगतार सिंह उर्फ जग्गा, रविंदर सिंह उर्फ पीटर, नरोत्तम सिंह उर्फ बिल्लू, केहर सिंह, लाल सिंह, ओमकार सिंह (अब नहीं रहे), वकील सिंह (अब नहीं रहे), प्रदीप सिंह उर्फ डोढो, मनोहर सिंह उर्फ टूटी और संगरूर सिंह उर्फ मखनू के खिलाफ काना चक थाना में आरपीसी की धारा 302, 307, 148, 149, 201 और 3/25, 4/27 आर्म्स एक्ट के तहत वर्ष 1993 में मामला दर्ज किया गया था।
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वर्ष 1996 में सेशन जज जम्मू की अदालत ने अरोपी सरायन सिंह, विजय सिंह, जगतार सिंह उर्फ जग्गा, रविंदर सिंह उर्फ पीटर, नरोत्तम सिंह उर्फ बिल्लू, केहर सिंह, लाल सिंह, ओमकार सिंह (अब नहीं रहे), वकील सिंह (अब नहीं रहे), प्रदीप सिंह उर्फ डोढो को दोषी पाते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
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उल्लेखनीय है कि तत्काल अपील के लंबित होने के दौरान ओमकार सिंह और वकील सिंह की सामान्य मौत हो गई। इसी कारण अपील में सरायन सिंह, विजय सिंह, जगतार सिंह उर्फ जग्गा, रविंदर सिंह उर्फ पीटर, नरोत्तम सिंह उर्फ बिल्लू, केहर सिंह, लाल सिंह, प्रदीप सिंह और मनोहर सिंह बच गए।

छुट्टी पर हैदराबाद से घर लौट रहे थे

Permission to appeal after 18 years in murder

केस के अनुसार मोहन सिंह के बेटे सैन्य कर्मी पीडब्ल्यू सिकंदर सिंह छुट्टी पर हैदराबाद से अपने घर लौट रहे थे। जम्मू से उन्होंने मरजाली के लिए बस पकड़ी। भूमि विवाद के कारण आरोपियों ने उन्हें रोककर उनकी हत्या कर दी। सूचना के आधार पर काना चक पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया।

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि इंस्टेंट क्रिमनल अपील को आंशिक रूप से अनुमति दी जा सकती है, क्योंकि आरपीसी की धारा 148 के आरोपों से आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इसके अलावा सरायन सिंह को छोड़ अन्य आरोपियों को धारा 302, 149 से बरी किया गया था। इसके अलावा कुछ अन्य धाराओं से कुछ आरोपियों को बरी किया गया।

शेष सजा भुगतनी होगी

Permission to appeal after 18 years in murder

खंडपीठ ने पाया कि वर्तमान केस के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए निचली अदालत द्वारा तय पांच साल की सश्रम कैद को कम किया जा सकता है, जो उन्होंने इस केस में पहले ही सजा पा ली है।

हालांकि तीन आरोपियों सरायन सिंह और रविंदर सिंह आर्म्स एक्ट तथा जगतार सिंह धारा 201 के आरोपों से बरी कर दिए गए हैं, लेकिन उन पर लगे जुर्माने की सजा बरकरार रहेगी।

खंडपीठ ने पाया कि इंस्टेंट क्रिमनल अपील के दौरान तमाम आरोपी जमानत पर हैं। लाल सिंह, विजय सिंह और करतार सिंह पहले ही विचाराधीन कैदी के रूप में अपनी सजा भुगत चुके हैं। सिर्फ सरायन सिंह की जमानत खारिज है। उसे अपनी शेष सजा भुगतनी होगी।
जेएनएफ

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