पाकिस्तानी रेडियो की खनक सुन रहे हैं पहाड़ी लोग
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उधमपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में भी पाक रेडियो साफ-साफ सुना जा रहा है। उधमपुर के उत्तरी कमान हेडक्वार्टर और एयरफोर्स स्टेशन में भी पाक रेडियो सिग्नल सुनाई दे जाता है। जबकि भारतीय रेडियो या एफएम की आवाज स्थानीय लोग नहीं सुन पा रहे हैं।
पाक दुष्प्रचार को लोग नहीं सुन पाए, इसके लिए सुरक्षा एजेंसियां काम कर रही हैं। केंद्र सरकार को भारतीय रेडियो की फ्रिक्वेंसी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
उधमपुर के घोरडी, बरमीन, पंचैरी रास्ते जाने के दौरान पाकक रेडियो की आवाज आसानी से सुनी जा सकती है। अगर कोई भी इस मार्ग से अपनी गाड़ी में भी जा रहा हो। उसे पाकिस्तान के प्रोग्राम साफ सुनाई देंगे। बस केवल रेडियो की ट्यूनिंग करनी है।
भारतीय रेडियो या एफएम की नहीं मिलती फ्रिक्वेंसी
पाक मीडिया द्वारा भारत के खिलाफ दुष्प्रचार को भी लोग आसानी से सुन रहे हैं। भारतीय रेडियो को इन क्षेत्र के लोगों ने कभी नहीं सुना है। हालांकि उधमपुर पाक सीमा से सटा हुआ नहीं है। पाक सीमा से काफी दूर है, लेकिन उत्तरी कमान के हेडक्वार्टर और एयरफोर्स स्टेशन में भी कई जगहों पर पाक का दुष्प्रचार सुना जा रहा है।
जहां सियाचीन में चीन के रेडियो और टीवी सिग्नल को आसानी से लोग देख रहे हैं। सियाचीन की रक्षा कर रहे जवान भी पड़ोसी देशों के मीडिया पर निर्भर हैं। वहीं, उधमपुर जैसे शांत शहर में भी भारत का मीडिया नहीं दिख रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में पाक दुष्प्रचार को रोकने के लिए कठुआ में रेडियो स्टेशन स्थापित किया है। पाक दुष्प्रचार को रोकने के लिए उधमपुर में भी एफएम स्टेशन खोलने की मांग है। उसका प्रयास भी ठंडे बस्ते में है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने रेडियो कश्मीर जम्मू की फ्रिक्वेंसी बढ़ाने और एफएम स्टेशन स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा है।
उत्तरी कमान के प्रवक्ता कर्नल एसडी गोस्वामी के अनुसार पाक रेडियो की फ्रिक्वेंसी काफी अधिक है। सेना ने भी प्रस्ताव भेजा है कि भारतीय रेडियो की फ्रिक्वेंसी बढ़ाई जाए। इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पाक रेडियो का सिग्नल आ रहा है। उन क्षेत्रों में भी भारतीय रेडियो का सिग्नल पहुंचे, इसके लिए सेना गंभीरता से कार्य कर रही है।