निजी हितों के लिए कुछ लोग धर्म के नाम पर बांट रहे हैं: फारूक
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पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि कुछ लोग अपने हितों के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता की प्रक्रिया में खलल डाल रहे हैं। ऐसे लोग पठानकोट जैसे हमले और धर्म के नाम पर समाज को बांट रहे हैं।
यदि जम्मू-कश्मीर में हिंसा को रोकना है तो पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता जारी रखना सबसे जरूरी है। फारूक रविवार को अखनूर में एक अस्पताल का उद्घाटन करने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति वार्ता के लिए अच्छा संकेत दिया, जो कांग्रेस पिछले दस सालों में नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों देश परमाणु संपन्न देश हैं। इसलिए दोनों के हितों के लिए शांति प्रक्रिया ही एकमात्र साधन है।
सभी धर्मों के लोग जम्मू कश्मीर और देश का हिस्सा हैं
फारूक ने कहा कि महंगाई के चलते हालात ऐसे हैं कि रोजमर्रा और खाने पीने की चीजें लोगों से दूर हो रही हैं। देश में हिंसा सस्ती हो गई है। इसे अगर रोकना है तो समाज को मजबूत करना होगा।
आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना होगा। हिंदू-मुस्लिम समेत सभी धर्मों के लोग जम्मू कश्मीर और देश का हिस्सा हैं। गरीबों की मदद के लिए हर इंसान को आगे आना होगा। भगवान की सेवा से बढ़कर यह सेवा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि रियासत के विकास के लिए लड़कियों को शिक्षा देना बेहद जरूरी हो गया है। इस अवसर पर पूर्व मंत्री मुस्तफा कमाल, सुरजीत सिंह, डिप्टी स्पीकर नजीर गुरेजी, विधायक कृष्ण लाल, विधायक देवेंद्र राणा, अस्पताल के एमडी डाक्टर गफूर अहमद आदि मौजूद रहे।
पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा
फारूक ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को अब अपने घरों में वापस लौट आना चाहिए। कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से कश्मीरी पंडितों की घर वापसी पर चर्चा हो रही है मगर अब उनकी पूरे सम्मान के साथ वापसी होनी चाहिए।