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पहले जख्म मिले, अब सिर पर आशियाना भी नहीं

Fri, 17 Oct 2014 01:31 AM IST
Updated Fri, 17 Oct 2014 01:31 AM IST
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pak firing victim in GMC

अरनिया, महाशे दे कोठे, निवासी दस वर्षीय सुनील कुमार की टांगे और पीठ पाक गोलाबारी में बुरी तरह से छलनी हो गई थी। बुरी तरह से जख्मी हालत में किसी तरह जीएमसी पहुंचाया गया। अब डाक्टरों ने इलाज करके थोड़ा चलने-फिरने के काबिल बना दिया है।

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मगर पाक गोलों से आशियाने उजड़ जाने से सिर छिपाने के लिए कोई जगह नहीं बची है। जीएमसी से डिस्चार्ज होकर रेडक्रास अटेंडेंट सराय में पहुंच रहे गोलाबारी के घायलों की ऐसी ही दर्दनाक कहानी है। शरीर पर कई तरह के जख्म लिए यह अभागे अब सरकार की इनायत पर नजरें टिकाए हैं।

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अटेंडेंट सराय में पिछले दो दिन से जीएमसी से छह घायल डिस्चार्ज होकर पहुंचे हैं। इसमें मुनीश कुमार, दर्शना देवी, वीरो देवी, ज्योति देवी, हनी (2) (सभी निवासी अरनिया) शामिल हैं।
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फायरिंग में सिर से छिना आशियाना

pak firing victim in GMC

हनी के पिता पवन कुमार ने बताया कि वह पहले ही पाक गोलाबारी में पत्नी और बेटे के घायल होने का जख्म झेल रहे हैं, लेकिन अब उनके सामने परिवार के सिर पर छत दिलाने की चिंता बढ़ गई है।

अस्पताल से इलाज के बाद छुट्टी तो मिल गई है, लेकिन आगे जाने का कोई आसरा नहीं है। पाक गोलाबारी ने इस तरह से उजाड़ा था कि मारे गए परिवार के चार सदस्यों की अस्थियों को भी पांच दिन बाद उठाया जा सका।

कुनबे के सभी घर गोलाबारी में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और दोबारा जाने से वहां डर लग रहा है कि दोबारा परिवार को इस तरह अस्पताल लाने की नौबत न आ जाए।

पीड़ितों ने सरकार से मांगे प्लाट

pak firing victim in GMC

उन्होंने सरकार से मांग की कि पीड़ितों को शीघ्र प्लाट अलाट किए जाएं। इसी तरह सुनील के साथ तीमारदारी में लगे चाचा मोहन लाल ने बताया कि सितंबर के शुरू में पूरा परिवार जबरदस्त पाक गोलाबारी की चपेट में आ गया था।

कई परिवार के सदस्यों की जान चली गई। घरों की हालत ऐसी है कि वहां दोबारा रहना खतरे से खाली नहीं है। सुनील की चाची संतोष कुमारी ने बताया कि पाक गोलाबारी के प्रभावितों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आशियाना पाना है।

रीजनल रेडक्रास सोसायटी के सचिव आरसी पुरी कहते हैं कि पाक गोलाबारी के घायलों और तीमारदारों को नि:शुल्क अटेंडेंट सराय में ठहरने के साथ खाने की सुविधा मुहैया करवाई जा रही है।

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