राहत शिविरों में आकर पक रही रही सियासी रोटियां
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पाक गोलीबारी के प्रभावितों को विभिन्न सियासी पार्टियां अपनी ओर खींचने में लगी हुई हैं। विभिन्न राहत कैंपों में रह रहे सीमांत ग्रामीणों की सुध लेने के लिए आ रहे इन पार्टियों के नेताओं का मकसद केवल ग्रामीणों को दिलासा देना नहीं है।
ग्रामीणों की मानें तो हर कोई अपना राग अलाप रहा है और उनकी समस्याओं पर सालों पहले मिलने वाले आश्वासन अब भी दोहरा रहे हैं। ग्रामीण टेक चंद ने कहा कि पहले मुख्यमंत्री आए उन्होंने लोगों को दिलासा दिया कि अब वह पक्का हल ढूंढने का प्रयास करेंगे।
लेकिन इस बात का क्या कि इतने सालों से वह गोलीबारी को झेल रहे हैं तब प्रयास क्यों नहीं किया। वहीं ग्रामीण अशोक कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के बाद पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती आई उन्होंने दोनों देशों के साथ रक्षा मंत्रियों पर बयानबाजी की।
सियासतदां के झूठे वादों पर बढ़ रहा आक्रोश
लेकिन सीमांत ग्रामीणों के लिए उनकी पार्टी क्या करेगी या फिर वह क्या करने वाली है इसके लिए कोई बयान नहीं आया। वहीं बार्डर यूनियन के प्रधान भारत भूषण ने कहा कि सीमांत ग्रामीणों को किन परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है।
यह बात नेताओं और सियासतदानों से अधिक बेहतर वह जानते हैं लेकिन समस्याओं का निवारण कैसे होगा यह पार्टियों को सोचना है। राहत शिविरों में आकर सियासी रोटियां पकाई जा रही है।
पहले नेकां, फिर पीडीपी उसके बाद भाजपा फिर कांग्रेस बारी बारी कर सभी पार्टियों के आला नेताओं ने शिविरों का दौरा कर लिया और एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ बयानबाजी कर ली लेकिन उनकी समस्या के लिए उनके पास क्या योजना है इसके बारे में कुछ नहीं कहा।
सालों पहले जो आश्वासन दिए गए वहीं आज भी दिए जा रहे हैं। असल में शिविरों के दौरे पर आने वाले नेता विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी प्रचार करने से चूक नहीं रहे हैं।