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अलगाववादियों नेताओं की सुरक्षा वापस लेने पर हो पुनर्विचार, नहीं तो खटखटाएंगे अदालत का दरवाजा: उमर

Thu, 21 Feb 2019 11:17 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Thu, 21 Feb 2019 11:17 PM IST
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omar abdullah said government should think again on the removal of security of separatist leaders
उमर अब्दुल्ला - फोटो : फाइल
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अलगाववादियों की सुरक्षा वापस लेने से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर विचार किए बिना सुरक्षा वापस ली गई है। अगर इस पर दुबारा गौर नहीं किया गया तो अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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श्रीनगर में वीरवार को पत्रकारों से बातचीत में उमर ने कहा कि मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं कि क्या कोई प्रदान की गई सुरक्षा का दुरुपयोग कर रहा था, लेकिन सुरक्षा मुहैया किया जाना सरकार का फैसला था। सरकार ने अपनी सूझबूझ के साथ सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के प्रभाव और निहितार्थ को देखने के लिए इंतजार करना होगा। 
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मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और अब्दुल गनी लोन का नाम लेते हुए उमर ने कहा कि जम्मू कश्मीर के दो सीनियर अलगाववादी नेता जो समय-समय पर बातचीत के जरिये जम्मू कश्मीर की समस्या का समाधान निकालने के पक्ष में थे, को आतंकवादियों द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया। उसके बाद से जो भी हुकूमत आई वह अलगाववादियों को सुरक्षा देने के हक में थी। आज जो सुरक्षा वापस लेने का फैसला लिया गया है वो उनका काम है यह देखना कि वे इस निर्णय के बाद उत्पन्न होने वाले हालातों से कैसे निपटेंगे।       
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उमर ने कहा कि मेरी चिंता अलगाववादियों की सुरक्षा वापस लेने के फैसले से कहीं परे है। मेरे लिए मुख्यधारा से जुड़े लोगों की सुरक्षा वापस लिया जाना बड़ी चिंता का विषय है। एक ओर तो आप कहते हैं कि चुनावों के लिए तैयार रहें और दूसरी ओर यह कहा जा रहा है कि आप सुरक्षा के लायक नहीं। उमर ने कहा कि शाह फैसल या पीडीपी से अन्य कुछ लोगों का नाम आया है अगर उनकी सुरक्षा वापस ली जाती है तो यह फैसला राजनीतिक गतिविधियों को अंजाम देने में किस हद तक बाधा उत्पन्न कर सकता है। 


उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा वापस लेना एक प्रतिगामी कदम है। उमर ने यह भी कहा कि राज्यपाल को इस फैसले पर दुबारा गौर करना होगा। उन्होंने कहा कि जहां तक उन्हें लगता है कि इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा इस फैसले का समर्थन नहीं किया गया होगा। अगर इस फैसले पर गौर नहीं किया गया तो हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और उनसे कहेंगे कि वो दस्तावेज तलब करें जिनके आधार पर यह फैसला लिया गया।
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