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J&K:बीडीसी चुनाव में नहीं करनी होगी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था, आतंकी हमलों के इनपुट, घुसपैठ की आशंका

Tue, 01 Oct 2019 12:03 AM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर Published by: Pranjal Dixit Updated Tue, 01 Oct 2019 12:03 AM IST
सार

  • प्रदेश में पहले से तैनात हैं एक लाख अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी
  • आतंकी हमलों के इनपुट, घुसपैठ की आशंका पर चौकसी बढ़ाई जा रही

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No Additional security arrangements in Jammu Kashmir Block Development Council election
सुरक्षाबल - फोटो : फाइल, अमर उजाला

विस्तार

ब्लॉक डेवलेपमेंट काउंसिल (बीडीसी) चुनाव की घोषणा के बाद सुरक्षा को चाक चौबंद करने की तैयारी की जा रही है। राज्य में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से बढ़ाई गई सुरक्षा के चलते चुनाव आयोग को सुरक्षा इंतजामों में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। हालांकि आतंकियों से निपटने की चुनौती जरूर रहेगी। जम्मू-कश्मीर में 24 अक्तूबर को बीडीसी चुनाव होने हैं। 310 ब्लाकों के लिए 350 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। 
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जानकारी के अनुसार, राज्य के हर एक ब्लाक में इस समय स्थानीय पुलिस के अलावा अर्धसैनिक बल मौजूद हैं। बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान भी तैनात हैं। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम काफी हद तक पहले से सुनिश्चित हो चुके हैं। इसके अलावा पुलिस भी अपने स्तर पर तैयारी कर रही है।
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सूत्रों का कहना है कि चुनाव के लिए बाहर से अतिरिक्त सुरक्षाबलों को नहीं बुलाया जाएगा। क्योंकि इस समय एक लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस के 40 हजार पुलिस कर्मियों को भी चुनाव के लिए लगाया जाएगा। यह सब अपने अपने क्षेत्र में रहेंगे। 
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उधर, चिनाब घाटी में पिछले एक साल के दौरान चार आतंकी वारदातों की घटनाओं के बाद सुरक्षा तंत्र की चुनौतियां जरूरी हैं। कश्मीर संभाग में आतंकी हमलों की आशंका है। जम्मू संभाग में भी लगातार आतंकी हमलों के इनपुट आ रहे हैं। इन सबके बीच चुनाव कराने की चुनौती रहेगी। चुनाव को लेकर सुरक्षा इंतजामाें पर डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया करने से मना कर दिया।

गैर दलीय आधार पर हों चुनाव: एजेकेपीसी

आल जेएंडके पंचायत कान्फ्रेंस (एजेकेपीसी) के प्रांतीय प्रधान अरुण शर्मा ने गैर दलीय आधार पर बीडीसी चुनाव करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंच और सरपंच दलीय स्तर पर चुनाव करवाने के फैसले के खिलाफ हैं। पंचायत चुनाव गैर दलीय स्तर पर करवाए गए थे, जिससे बीडीसी चुनाव भी उसी की तर्ज पर करवाए जाने चाहिए। 

उन्होंने पंचायतों के विकास के लिए राशि जारी न करने पर रोष जताया तथा पंचायती स्तर पर करवाए गए विकास कार्यों की जांच की मांग भी उठाई।  कहा कि पंचायत चुनाव के बाद जम्मू-कश्मीर में कोई विकास कार्य पूर्ण नहीं कराया गया है। जबकि राज्यपाल बैक टू विलेज प्रोग्राम के तहत प्रत्येक जिले में विकास के लिए पांच करोड़ रुपये देने के दावे कर रहे हैं। पंचायत हलका गंदली गुरदीप सैनी ने बीडीसी चुनाव को गैर दलीय कराने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। इस दौरान सरपंच सुरजीत सिंह, तिलक राज, तरसेम, दर्शना, प्रताप सिंह मौजूद रहे।

आचार संहिता का सख्ती से पालन हो : डीईओ
जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ) सुषमा चौहान ने सोमवार को विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर बीडीसी चुनाव में आचार संहिता का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी पंचायत हलकों (ग्रामीण क्षेत्र) में आचार संहिता पर नजर रखी जाए। यह सभी उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और राज्य व केंद्र कर्मचारियों पर लागू होगा।

भाजपा ने घाटी में शुरू किया प्रचार, 95 फीसदी सीटों पर किया जीत का दावा

ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) चुनावों को लेकर भाजपा ने कमर कस ली है। उसने घाटी में प्रचार शुरू कर दिया है। भाजपा को उम्मीद है कि घाटी की 95 सीटों पर वह अपना परचम लहराएगी। 24 अक्तूबर को होने वाले चुनावों को लेकर भाजपा के पंचों व सरपंचों में काफी उत्साह है।

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अल्ताफ  ठाकुर कहते हैं कि यहां के जो क्षेत्रीय राजनीतिक दल थे उन्होंने कभी नहीं चाहा कि यहां पंचायती राज मजबूत हो। इन दलों की नजर में केवल विधानसभा और लोकसभा के चुनाव ही लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर के लोगों से गली मोहल्ले तक विकास पहुंचाने का जो वादा किया था ये चुनाव उसी का हिस्सा हैं।

अल्ताफ ठाकुर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वर्तमान में कोई पंच-सरपंच बंद नहीं है, अगर कोई बंद है तो वो लोग बंद हैं जिन्होंने 70 वर्षों तक देश को लूटा। उन्होंने कहा कि बीडीसी चुनावों को लेकर आज श्रीनगर में एक एहम बैठक हुई जिसमें 10 बीडीसी इलेक्शन इंचार्ज और 115 ब्लाक इंचार्ज की सूची तैयार हो गई है। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि हर ब्लाक में जाकर इन चुनावों के फायदे लोगों को बताएं।

चुनाव से काफी उम्मीदें
दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले के ब्लाक देवसर के सरपंच विजय रैना ने बताया कि काफी खुशी है कि पिछले 72 सालों में यह चुनाव हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने अपना चेयरमैन चुनने का मौका दिया है इसके लिए धन्यवाद करते हैं। इससे इलाके को काफी लाभ मिलेगा। केंद्र से आने वाला फंड ज़मीनी स्तर तक पहुंचेगा। वहीं अनंतनाग जिले के अच्छाबल ब्लॉक के एक अन्य पंच मोहम्मद मकबूल गनई ने कहा कि इस चुनाव से काफी उम्मीदें हैं। मकबूल ने कहा कि इससे गरीब से गरीब आदमी का लाभ होगा। 
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