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मूक मित्रों के लिए सालों से छुट्टी पर नहीं गए वेद प्रकाश

Sun, 21 Feb 2016 12:57 PM IST
Updated Sun, 21 Feb 2016 12:57 PM IST
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news story on animal lover ved prakash

सड़क हादसे में बुरी तरह से घायल शेरू का बचना मुश्किल था। लेकिन ऐन मौके पर इलाज और महीनों दिन रात की सेवा से उसे बचा लिया गया। फिर पुनर्वास के तौर पर उसे पंद्रह किलोमीटर दूर स्थित उसके इलाके में छोड़ दिया गया। कुछ दिन बाद वह लौट आया।

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रूपनगर इलाके में चल रहे म्यूनिसिपल एनिमल केयर सेंटर में अक्सर ऐसे दृश्य उभरते हैं। यहां नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में विभिन्न हादसों में घायल होने वाले लावारिस मवेशियों का इलाज और पुनर्वास किया जाता है।
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केयर सेंटर के वर्कर वेद प्रकाश का अनोखा पशु प्रेम मौत के मुंह में पहुंच चुके इन मूक मित्रों को नया जीवन दिलाता है। वेद प्रकाश केयर सेंटर में पीड़ा से कराहते पशु को आत्मीयता से सहारा देते हैं।
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ऑपरेशन के बाद तीमारदारी के लिए मामला वेदप्रकाश के पास पहुंच जाता है जिसके बाद वे चौबीसों घंटे हादसों के शिकार जानवरों की सेवा में जुट जाते हैं। वेद प्रकाश रात को भी सभी जानवरों को अपने कमरे में ही साथ रखते हैं।

कई सालों से नहीं ली छुट्टी

news story on animal lover ved prakash

उनकी सेवाएं पशु प्रेम को समर्पित जुनून की तरह हैं। उनका अपना परिवार है पर वह छुट्टी लेकर घर नहीं जाते। अफसरों से शिकायत करते भी हैं तो सिर्फ पशुओं की सेवा से जुड़ी हुई।

वेद प्रकाश बताते हैं सेंटर में उपचाराधीन पचास के करीब कुत्तों के उन्होंने खुद नाम रखे हैं। उनके स्वभाव, पसंद और मूड की जानकारी होने की वजह से वह चौबीसों घंटे उन्हीं के साथ रहते हैं।

ग्रेजुएट होने के बावजूद कोई और काम क्यों नहीं सूझा इस सवाल पर वेदप्रकाश कहते हैं इसे मेरा जुनून समझ लीजिए। पशुओं का पुनर्वास उन्हें बेहद ही सुकून देता है। शायद इसी वजह से उनके कई दोस्त अपने इलाकों में छोड़े जाने के बाद फिर लौट आते हैं।

केयर सेंटर में तैनात पशुपालन विभाग के डा. विकास मंगोत्रा और डा. अमरताज सिंह बताते हैं सरकारी विभागों और गैर सरकारी संस्था के सहयोग से चलाए जा रहे सेंटर में लावारिस पशुओं का पुनर्वास किया जाता है।

छोटे बड़े मवेशी यहां बेहद संकट की स्थिति में लाए जाते हैं और आधुनिक सुविधाओं के बीच उन्हें बचाकर फिर से छोड़ दिया जाता है।

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