हिंसा के कारण कश्मीर से बढ़ रहा है मुस्लिम परिवारों का पलायन
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हिंसा और उपद्रव के कारण कश्मीर से पलायन को मजबूर हुए पंडितों का मसला अब भी अनसुलझा है और अब मुस्लिम परिवारों का भी कश्मीर से पलायन बढ़ने लगा है। अमन पसंद कश्मीरी मुसलमानों का समूह अब रोज-रोज की हिंसा से ऊब चुका है।
ऐसे मुस्लिम परिवार अब कश्मीर घाटी छोड़कर जम्मू और दिल्ली में बसने लगे हैं। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि श्रीनगर उपचुनाव की हिंसा के बाद ऐसे मुस्लिम परिवारों का पलायन और बढ़ सकता है।
कश्मीर छोड़ने वाले मुस्लिम परिवारों को आतंकी संगठनों और उपद्रवियों से धमकियां भी मिल रहीं हैं, लिहाजा ऐसे परिवार अपनी पहचान छिपाने को भी मजबूर हो रहे हैं। विस्थापित कश्मीर मुस्लिम परिवारों की संख्या बढ़कर अब 2252 हो गई है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुरू किया है पलायन करने वालों का पंजीकरण
जम्मू कश्मीर सरकार पलायन करने वाले मुस्लिम परिवारों का पहले आंकड़ा नहीं रखती थी लेकिन पलायन में आ रही तेजी के बाद अब पलायन करने वाले मुस्लिम परिवारों का भी पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। यह संख्या 2252 परिावर तक पहुंची है।
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों 45 मुस्लिम परिवारों ने कश्मीर से पलायन के बारे में रियासत सरकार को जानकारी दी है। रियासत सरकार ने एक समिति के जरिए इन मामलों की जांच भी कराई।
जांच के बाद अब तक 21 मुस्लिम परिवारों का पंजीकरण कर लिया गया है। सूत्रों ने कहा कि ये वैसे मुस्लिम परिवार हैं जो पलायन के बाद कश्मीरी पंडितों की तर्ज पर विस्थापित श्रेणी में मिलने वाली सुविधाएं चाहते हैं।
उपचुनाव में हिंसा के बाद और बढ़ सकता है पलायन
हिंसा के कारण कश्मीर छोड़ने वाले अधिकांश मुस्लिम परिवार संपन्न हैं और ऐसे परिवार विस्थापितों की सुविधा हासिल किए बगैर अपने बच्चों के करियर के लिए घाटी छोड़ रहे हैं। अलगाववादियों और उपद्रवियों के कहर से बचने के लिए ऐसे लोग घाटी में अपनी संपत्ति पूरी तरह बेच नहीं रहे हैं लेकिन परिवार समेत दिल्ली, जम्मू और देश के अन्य शहरों में स्थायी रूप से रहना शुरू हो गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि श्रीनगर उपचुनाव में व्यापक हिंसा के बाद कश्मीर से मुस्लिम परिवारों का पलायन और बढ़ सकता है। एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक अनुमान के अनुसार जम्मू और दिल्ली में दस हजार से अधिक कश्मीरी मुस्लिम परिवारों ने अपने बच्चों के कोचिंग और अन्य शिक्षण संस्थानों में नामांकन के लिए एप्रोच किया है।