जम्मू कश्मीर में बदल गया नौकरशाही का मिजाज
- हर निर्देश के साथ सीमित अवधि में काम पूरा करने का टारगेट दिया जा रहा है।
- सरकारी विभागों के लिए काम करने वाले जम्मू-कश्मीर के ठेकेदारों की भारी भरकम राशि सरकार के पास बकाया है।
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रियासत में राज्यपाल शासन से नौकरशाही की चाल अब सरपट हो गई है। शासन की ओर से ताबड़तोड़ निर्देश जारी हो रहे हैं वह भी छोटी अवधि की मोहलत के साथ। स्थानीय महत्व के मामले हों या फिर राज्य और केंद्रीय योजनाओं पर अमल की बात, राज्यपाल जिस भी मामले को छू रहे हैं उस पर हर निर्देश के साथ सीमित अवधि में काम पूरा करने का टारगेट दिया जा रहा है।
इसी क्रम में सरकारी विभागों पर ठेकेदारों की देनदारी के मामले में तो मोहलत के समय ने कई विभागों को सन्न कर दिया। विभागों को राजभवन का हवाला देकर जारी किए गए इस आदेश में कहा गया कि सरकारी विभागों के लिए काम करने वाले जम्मू-कश्मीर के ठेकेदारों की भारी भरकम राशि सरकार के पास बकाया है।
देनदारी का यह कुल आंकड़ा दो हजार करोड़ रुपये है। यह देखते हुए विभागों को एक घंटे के भीतर संबंधित देनदारी का आंकड़ा विशेष संदेश के माध्यम से पहुंचाना होगा।
बेहद छोटी डेडलाइन देकर काम पूरा करने का आदेश जारी
इससे पहले भी राज्यपाल प्राथमिकता तय कर बेहद छोटी डेडलाइन देकर काम पूरा करने का आदेश जारी कर चुके हैं। पिछले दिनों ही राज्यपाल ने सितंबर 2014 की बाढ़ के प्रभावित मकानों का मुआवजा वितरण की तैयारी के लिए सात दिन और प्रभावितों के खातों में मुआवजा राशि ट्रांसफर करने के लिए महज पांच दिन की मोहलत दी थी।
वितरित होने वाली राशि करीब बारह सौ करोड़ रुपये है। इसी तरह से स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहरी इलाकों में शौचालय निर्माण का आंकड़ा जुटाने के लिए 9 मार्च तक का समय निर्धारित कर दिया। एक दिन पहले ही जम्मू एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए बिजली की अलाइनमेंट बदलने को साठ दिन और पुनर्वास कार्य के लिए तीस दिन की मोहलत दी।
कमोबेश ऐसी ही स्थिति कई अन्य परियोजनाओं की है, जहां पर राज्यपाल ने काम को समय से पूरा करने के दो टूक निर्देश दिए हैं। निदेशक स्तर के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब काम पहले से कहीं ज्यादा रफ्तार के साथ निपट रहे हैं।