विधायक रशीद ने कश्मीर को लेकर फिर दिया विवादित बयान
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आवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) के अध्यक्ष और उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के लंगेट से विधायक इंजीनियर रशीद ने बुधवार को श्रीनगर में एक बार फिर से कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से पाक अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है, वैसे ही कश्मीर भी भारत का हिस्सा नहीं है। रशीद ने कहा कि दोनों देशों को एक साथ बैठकर इस मुद्देका हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए और जनमत संग्रह की मांग करना कोई अपराध नहीं है।
मैं इसकी मांग मरते दम तक करता रहूंगा, क्योंकि जो जिसके साथ जाना चाहे, उसे उसके साथ जाने दिया जाना चाहिए। रशीद ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर विधान सभा में पीओके के लोगों के लिए 24 सीटें खाली रखी गई हैं। हो सकता है जनमत संग्रह के बाद वह भी हमारे साथ शामिल हो जाएं।
'राजनीतिक दबाव में मुझ पर शिकंजा कस रही पुलिस'
विधायक ने कहा कि अगर जनमत संग्रह की मांग करना अपराध है तो फिर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने मुझसे पहले यह अपराध किया है।
रशीद ने यह भी कहा कि जबसे वह विधायक बने हैं, उनपर शिकंजा कसा जा रहा है। कहीं भी जाने की अनुमति नहीं दी जाती। पुलिस पर निशाना साधते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस राजनीतिक दबाव में शिकंजा कसती है।
हाल का उदाहरण देते हुए कहा कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर एक ओर उन्हें समारोह में आमंत्रित किया जाता है, दूसरी ओर मेरे घर के बाहर सुबह से पुलिस की नफरी होती है, जो मुझे कहीं नहीं जाने देती।
विधायक रशीद राज्यपाल को सौंपेंगे ज्ञापन
विधायक रशीद ने कहा कि इस सबको लेकर मैं राज्यपाल को एक पत्र सौंपने जा रहा हूं। उम्मीद है कि वह इस पर गौर करेंगे।
उन्होंने राज्यपाल से यह भी कहा कि अगर उन्हें कोई शक है, तो वह पिछले छह वर्षों के भाषणों को चेक कर सकते हैं कि क्या उन्होंने कभी देश विरोधी भाषण दिया है।
रशीद ने यह भी कहा कि अगर उन पर की जा रही कार्रवाइयों को राज्यपाल गंभीरता से नहीं लेंगे, तो वह अपने विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। रशीद ने कहा कि वह इस सबको लेकर उच्च न्यायालय का भी रुख करेंगे। मामले में उन्होंने अपने वकील से बात कर दस्तावेज सौंप दिए हैं। कोर्ट की छुट्टियां संपन्न होने पर वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।