सरकार की बेरुखी से पदक से चूकी रियासत की बेटियां
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जम्मू की दो होनहार बेटियां मिताली और पलक कामनवेल्थ गेम में हिस्सा लेकर पदक के लिहाज से खाली हाथ वापस लौट आईं हैं। इस निराशा से न तो उनके हौसले टूटे हैं और न ही हिम्मत।
उनमें जुनून भी है और जज्बा भी। इसीलिए अब वे पूरे जोरशोर से एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप की तैयारियों में जुट गई हैं।
जम्मू के एमए स्टेडियम के एक पार्क से तैयारी करके स्काटलैंड के ग्लासगो शहर में कामनवेल्थ गेम्स तक का सफर तय करने के बाद पदक से वंचित रह जाने का मलाल उनके चेहरों पर साफ दिख रहा था।
क्षमता के अनुसार प्लेटफार्म नहीं मिल सका
अमर उजाला की टीम जब उनके घर पहुंची तो दोनों ने माना कि सरकार की उदासीनता न होती तो शायद नंबर वन पर भी आ जाते। रियासत के युवा विदेश में तिरंगे की शान बढ़ाने की क्षमता रखते हैं, लेकिन उन्हें वैसा प्लेटफार्म नहीं मिल पाता।
कामनवेल्थ गेम्स में भारतीय रिधमिक टीम का हिस्सा रहीं रियासत की वंडर गर्ल मिताली और पलक कौर बिजराल सरकार की बेरुखी से खफा हैं।
मिताली और पलक ने कहा कि जून में ठाणे में सीनियर नेशनल गेम्स में रजत और कांस्य पदक हासिल करने पर उनका कामनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय रिधमिक टीम में चयन हुआ था।
नेशनल टीम में चयन के बाद भी नहीं मिली सुविधाएं
उनके साथ तीसरी सदस्य पंजाब की प्रभजीत कौर थी। चयन होने पर भी उन्हें अभ्यास के लिए बढ़िया सुविधाएं प्रदान नहीं दी गईं। इसके बजाय एमए स्टेडियम के एकमात्र मल्टीपर्पज हाल को अपग्रेड के नाम पर तोड़ दिया गया।
दो हफ्ते बाहर पार्क में खुले में ही कामनवेल्थ गेम्स की तैयारी करनी पड़ी। फिर बीएसएफ पलोड़ा के मैदान में शरण लेनी पड़ी।
मिताली ने कहा कि वर्ष 2010 में दिल्ली में हुई कामनवेल्थ गेम्स में उसके बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद उसे चौथे स्थान पर रिजर्व में रखे जाने से उसे काफी निराशा हुई थी।
वर्ल्ड कप की तैयारी में जुटीं पलक और मिताली
इस बार रिधमिक में ओवरआल नौंवा स्थान पाने वाली भारतीय टीम की सदस्य मिताली और पलक ने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए रोजाना दस घंटे का अभ्यास किया।
अब दोनों ही एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप की तैयारी में जुटेंगी। कामनवेल्थ तक पहुंचने का श्रेय वे कोच कृपाली सिंह, एसपी सिंह और अभिभावकों को देती हैं।