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लोगों को भा रहीं फुलकारी, ऊन-रेशम से बनी राखियां
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जम्मू। कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद रक्षाबंधन को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। पर्व को लेकर बाजार सज चुके हैं, लेकिन चमक-धमक के बीच शहरवासियों को ऊन और रेशम से बनी परंपरागत राखियां भा रही हैं। हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग की ओर से जानीपुर में दो दिवसीय राखी मेला आयोजित किया गया। इसमें फुलकारी, बसोहली पेंटिंग, ऊन और रेश्मी धागे से बनी परंपरागत राखियां काफी पंसद आ रही है।
विभिन्न डिजाइन, आकार और रंग में उपलब्ध यह राखियां स्थानीय बुकनरों और कारीगरों ने तैयार की हैं। इसके साथ ही यह ईको-फ्रेंडली हैं। राखियों दस से 200 रुपए तक उपलब्ध हैं। मेले में 12 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां हस्तशिल्प उत्पाद उपलब्ध है। विभाग के निदेशक डॉ. विकास गुप्ता ने मेले का शुभारंभ किया। मेले के आयोजन का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को बाजार मुहैया करवाना है। हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों में फुलकारी राखी, बसोली पेटिंग राखियां, घर के सजावटी सामान व गेहूं के भूसे से बने उत्पाद हैं, जो शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने है। कारीगरों और बुनकरों का कहना है कि राखी से पहले मेले के आयोजन से उत्पादों की बिक्री होने की उम्मीद है। लोग भी स्थानीय उत्पादों को पसंद कर रहे हैं। युवा पीढ़ी की पसंद को ध्यान में रखते हुए राखियां तैयार की हैं।
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विभिन्न डिजाइन, आकार और रंग में उपलब्ध यह राखियां स्थानीय बुकनरों और कारीगरों ने तैयार की हैं। इसके साथ ही यह ईको-फ्रेंडली हैं। राखियों दस से 200 रुपए तक उपलब्ध हैं। मेले में 12 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां हस्तशिल्प उत्पाद उपलब्ध है। विभाग के निदेशक डॉ. विकास गुप्ता ने मेले का शुभारंभ किया। मेले के आयोजन का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को बाजार मुहैया करवाना है। हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों में फुलकारी राखी, बसोली पेटिंग राखियां, घर के सजावटी सामान व गेहूं के भूसे से बने उत्पाद हैं, जो शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने है। कारीगरों और बुनकरों का कहना है कि राखी से पहले मेले के आयोजन से उत्पादों की बिक्री होने की उम्मीद है। लोग भी स्थानीय उत्पादों को पसंद कर रहे हैं। युवा पीढ़ी की पसंद को ध्यान में रखते हुए राखियां तैयार की हैं।
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