महबूबा के बेतुके बोल: अफगानिस्तान को देखो, अमेरिका को भागना पड़ा, जिस दिन यहां सब्र की दीवार टूटी..
पीडीपी मुखिया ने कुलगाम में एक बेतुका बयान दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा कि जिस दिन सब्र की दीवार टूट जाएगी, तुम परास्त हो जाओगे। उन्होंने सरकार को अफगानिस्तान मामले से सीख लेने की नसीहत दी है।
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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती ने बेतुका बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अपने पड़ोसी(अफगानिस्तान) को देखो। जहां से महाशक्ति अमेरिका को अपनी सेना वापस बुलानी पड़ी। अमेरिका बोरिया-बिस्तर बांधकर वापस जाने पर मजबूर हो गया। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अगर केंद्र सरकार वाजपेयी के सिद्धांत पर वापस नहीं आती है और बातचीत शुरू नहीं करती, तो बर्बादी होगी।
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इसके बाद पीडीपी मुखिया ने कहा कि कश्मीरी कमजोर नहीं हैं, वे बहुत बहादुर और धैर्यवान हैं। धैर्य रखने के लिए बहुत साहस चाहिए। जिस दिन सब्र की दीवार टूट जाएगी, तुम परास्त हो जाओगे। आजादी के बाद अगर भाजपा की सरकार बनी होती तो जम्मू-कश्मीर भारत में न होता। बता दें कि महबूबा मुफ्ती ने ये बयान कश्मीर संभाग के कुलगाम में दिया है।
वहीं महबूबा मुफ्ती के बयान पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना ने पलटवार किया है। रैना ने कहा कि महबूबा मुफ्ती बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। भारत एक ताकतवर देश है। यहां देश के खिलाफ साजिश करने वालों का सफाया कर दिया जाएगा। उन्होंने पीडीपी मुखिया पर हमला बोलते हुए सवाल किया 'क्या महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर में तालिबानी राज चाहती हैं?'
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मीडिया और सरकारी संस्थानों का सरकार ने किया तालिबानीकरण- महबूबा मुफ्ती
इससे पहले महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर सरकारी संस्थानों(जांच एजेंसियों) का तालिबानीकरण करने का आरोप लगाया था। यह बात उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उनकी मां गुलशन नजीर से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा करीब तीन घंटे तक पूछताछ के बाद कही थी।
महबूबा ने कहा कि दुर्भाग्य से जिन संस्थानों को हमारे अधिकारों की रक्षा करनी थी और जिन्हें संविधान की भावनाओं को बनाए रखना था उनका तालिबानीकरण हो चुका है। आरोप लगाया कि मीडिया का भी तालिबानीकरण हो गया है। मुख्यधारा की अधिकतर मीडिया भाजपा की बातों पर चलती है।
महबूबा ने दावा किया था कि मैंने परिसीमन आयोग से मिलने से इनकार कर दिया, जिसके अगले दिन समन मिल गया। मैंने पांच अगस्त को शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, अगले दिन फिर समन मिल गया। एनआईए और ईडी जैसी एजेंसियों का गठन गंभीर कार्यों के लिए हुआ था लेकिन दुर्भाग्य से इन एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिज्ञों, छात्रों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों के खिलाफ किया जा रहा है।