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Jammu News: ब्रिक्स की बदलती भूमिका पर मंथन व्यवस्था में भारत के प्रभाव पर चर्चा
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जम्मू विश्वविद्यालय में ब्रिक्स की बदलती भूमिका पर मंथन और वैश्विक व्यवस्था में भारत विषय पर आ
- जेयू में दिल्ली घोषणा पर पैनल चर्चा, भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था और विकास के पहलुओं पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय (जेयू) के रणनीतिक एवं क्षेत्रीय अध्ययन विभाग ने ब्रिक्स 2026 : द दिल्ली डिक्लेरेशन विषय पर पैनल चर्चा की। विभाग के सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने ब्रिक्स की बदलती भूमिका, भारत के लिए इसके महत्व और उभरती वैश्विक व्यवस्था पर विचार-विमर्श किया।
राजनीतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. बलजीत सिंह मन्न ने ब्रिक्स के विस्तार और संस्थागत विकास को वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे बदलावों से जोड़ते हुए भारत की विदेश नीति के संदर्भ में समूह की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दिल्ली घोषणा से ब्रिक्स की उभरती प्राथमिकताओं और अधिक प्रतिनिधित्व वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की संभावनाओं को समझने में मदद मिलती है।
अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. फलेंद्र के सूदन ने आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, वित्तीय संस्थानों और विकास साझेदारी पर चर्चा की। उन्होंने विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के संदर्भ में ब्रिक्स के अवसरों और चुनौतियों को रेखांकित किया। जेकेएएस अधिकारी नागेंद्र सिंह जमवाल ने प्रशासनिक और नीतिगत दृष्टिकोण से वैश्विक आर्थिक व भू-राजनीतिक बदलावों के भारत पर प्रभाव की चर्चा की।
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अध्यक्षता कर रहे अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. दीपांकर सेनगुप्ता ने कहा कि ब्रिक्स को बदलती वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था के व्यापक संदर्भ में समझने की जरूरत है। डीएसआरएस के निदेशक प्रो. वीरेंद्र कौंडल ने स्वागत भाषण दिया। प्रश्नोत्तर सत्र में वैश्विक शासन, ग्लोबल साउथ और भारत की भूमिका से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में शोधार्थियों व विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय (जेयू) के रणनीतिक एवं क्षेत्रीय अध्ययन विभाग ने ब्रिक्स 2026 : द दिल्ली डिक्लेरेशन विषय पर पैनल चर्चा की। विभाग के सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने ब्रिक्स की बदलती भूमिका, भारत के लिए इसके महत्व और उभरती वैश्विक व्यवस्था पर विचार-विमर्श किया।
राजनीतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. बलजीत सिंह मन्न ने ब्रिक्स के विस्तार और संस्थागत विकास को वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे बदलावों से जोड़ते हुए भारत की विदेश नीति के संदर्भ में समूह की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दिल्ली घोषणा से ब्रिक्स की उभरती प्राथमिकताओं और अधिक प्रतिनिधित्व वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की संभावनाओं को समझने में मदद मिलती है।
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अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. फलेंद्र के सूदन ने आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, वित्तीय संस्थानों और विकास साझेदारी पर चर्चा की। उन्होंने विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के संदर्भ में ब्रिक्स के अवसरों और चुनौतियों को रेखांकित किया। जेकेएएस अधिकारी नागेंद्र सिंह जमवाल ने प्रशासनिक और नीतिगत दृष्टिकोण से वैश्विक आर्थिक व भू-राजनीतिक बदलावों के भारत पर प्रभाव की चर्चा की।
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अध्यक्षता कर रहे अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. दीपांकर सेनगुप्ता ने कहा कि ब्रिक्स को बदलती वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था के व्यापक संदर्भ में समझने की जरूरत है। डीएसआरएस के निदेशक प्रो. वीरेंद्र कौंडल ने स्वागत भाषण दिया। प्रश्नोत्तर सत्र में वैश्विक शासन, ग्लोबल साउथ और भारत की भूमिका से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में शोधार्थियों व विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।