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घाटी की सियासत में आया नया मोड़, महबूबा के करीबी मंसूर ने दिया इस्तीफा, हक और मीर ने बनाई दूरी

Wed, 17 Feb 2021 04:03 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Wed, 17 Feb 2021 04:03 PM IST
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Mehbooba Mufti PDP leader Pir Mansoor has announced his resignation
महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला

पीडीपी के नेता पीर मंसूर ने पार्टी से इस्तीफा देने का एलान किया है। पीर मंसूर महबूबा मुफ्ती के काफी नजदीक माने जाते थे, वह करीबी रिश्तेदार भी हैं। मंसूर के इस फैसले से घाटी की सियासत में एक नया मोड़ आ गया है। पीर मंसूर शांगस से विधायक थे और भाजपा पीडीपी सरकार में महबूबा मुफ्ती के राजनीतिक सलाहकार भी रहे हैं। अभी वह पार्टी के जनरल सेक्रेटरी थे।

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उधर, महबूबा मुफ्ती की कुपवाड़ा रैली से पीडीपी के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री अब्दुल हक खान और पूर्व राज्यसभा सदस्य फैयाज मीर गैरहाजिर रहे। इतने लंबे समय बाद हुई पार्टी की रैली से दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 
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पीडीपी की जिला इकाई ने इनकी गैरमौजूदगी पर कहा कि उन्हें उन्हें निमंत्रण नहीं भेजने के लिए कहा गया था। यह बताया गया था कि पार्टी मुख्यालय उन्हें खुद बुलाएगा। उन्हें नहीं पता कि आखिर वह इसमें क्यों नहीं शामिल हुए।

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हम चाहते हैं कि राज्य की पांच अगस्त 2019 के पहले जो स्थिति थी उसे लौटाया जाए- महबूबा

महबूबा ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के टाउन हॉल में आयोजित पहली जनसभा में कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की हम मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम चाहते हैं कि राज्य की पांच अगस्त 2019 के पहले जो स्थिति थी उसे लौटाया जाए। 

महबूबा ने कहा कि हमारी प्राथमिकता राज्य के दर्जे की बहाली नहीं है, बल्कि पांच अगस्त से पहले की स्थिति बहाल करना है। जम्मू-कश्मीर के मसले का यहां के लोगों और पाकिस्तान के साथ बातचीत कर उसका हल निकाला जाए। 

महबूबा ने कहा कि जहां भी कोई आवाज उठाता है उसकी आवाज दबाई जा रही है। पीएजीडी लोगों की आकांक्षाओं की बात करती है और तब तक यह गठबंधन जारी रहेगा जब तक लोग चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम यह भी अपील करते हैं कि बाहर की जेलों में जो लोग बंद हैं जिनमें इंजीनियर रशीद भी शामिल हैं, इन सबको जल्द रिहा करना चाहिए। 

कहा कि आज लोग पहले पकड़े जा रहे हैं फिर उन पर जुर्म साबित किया जा रहा है। हमारे कई नेताओं को पकड़ा गया है। उन्हें न तो कोई आदेश दिखाया गया है और न ही उनके खिलाफ कोई जुर्म है। प्रदेश में पूरी तरह से जंगल राज कायम हो गया है। 

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