आतंक पर प्रहार: कश्मीर में आतंकियों से निपटेगा ‘मार्क्समैन’, गोली लगने के बाद भी काम करता रहेगा कॉम्बैट वाहन
सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि यह विशेष वाहन आतंकवाद विरोधी अभियानों और राजमार्ग पर गश्त के दौरान गेम चेंजर साबित होंगे। यह वाहन मुठभेड़ के दौरान आतंकियों के ठिकाने के काफी करीब तक जा सकता है। बिना सुरक्षाबलों के गाड़ी से उतरे आतंकियों पर हमला कर सकता है।
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को विशेष बुलेट प्रूफ, मार्क्समैन टेक्निकल इंटरवेंशन लाइट मोटर वाहन मुहैया कराया गया है। इस कॉम्बैट वाहन के अंदर एक डिस्प्ले स्क्रीन लगी है, जिस पर बाहर के 360 डिग्री दृश्य पीटीजेड कैमरे के जरिये देखे जा सकते हैं। वाहन में उच्च तकनीक वाले उपकरण लगे हैं। एक रन फ्लैट टायर सिस्टम है। यदि गोली वाहन के टायर को हिट करती है तो यह सैकड़ो किलोमीटर तक पूरी गति से दौड़ सकता है।
पूरी तरह मेक इन इंडिया वाहन
प्रदेश में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले ये वाहन अपनी तरह के पहले ऐसे ‘मेक इन इंडिया’ वाहन हैं। सीआरपीएफ व जेके पुलिस को हाल ही में घाटी में सुचारू और सुरक्षित आतंकवादी विरोधी अभियानों के लिए ऐसे कई वाहन उपलब्ध कराए गए हैं।
गश्त के दौरान गेम चेंजर साबित होंगे
ये विशेष वाहन आतंकवाद विरोधी अभियानों और राजमार्ग पर गश्त के दौरान गेम चेंजर साबित होंगे। एक अधिकारी ने बताया कि यह वाहन मुठभेड़ के दौरान आतंकियों के ठिकाने के काफी करीब तक जा सकता है और एक सिपाही बिना गाड़ी से उतरे आतंकियों पर हमला कर सकता है।
आतंक विरोधी अभियान में शामिल होंगे
वाहन तंग गलियों से भी गुजर सकता है और बस्तियों में भी आतंक विरोधी अभियान में शामिल हो सकता है। हाल ही में कई बार देखा गया है कि आतंकियों द्वारा स्टील बुलेट का इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन इस कॉम्बैट व्हीकल पर न तो स्टील बुलेट और न ही ग्रेनेड का असर होगा, जिससे इसमें बैठे जवान काफी हद तक सुरक्षित रहेंगे।
कानून व्यवस्था के लिए भी अहम भूमिका निभाएंगे
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कॉम्बैट वाहन आतंक विरोधी अभियानों में गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। इसके साथ कानून व्यवस्था के लिए भी अहम भूमिका निभा सकते है, क्योंकि इसके अंदर बैठकर ही जवानों को बाहर का 360 डिग्री व्यू मिल पाता है, जिससे वे रणनीति बना सकते हैं।
- महिंद्रा कंपनी की ओर से बनाया गया मार्क्समैन भारत का पहला बुलेट प्रूफ कैप्सूल आधारित हल्का वाहन है, जो छोटे हथियारों की आग और ग्रेनेड हमलों के खिलाफ रक्षा और सुरक्षा बलों को सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें काउंटर टेररिस्ट के साथ-साथ पारंपरिक भूमिकाओं में इस्तेमाल होने की क्षमता है।
महिंद्रा मार्क्समैन का डिजाइन 2006 में तैयार किया गया था और पहली बार 2009 में इसका अनावरण किया गया था। इसे पहले मुंबई पुलिस के फोर्स वन द्वारा सेवा में रखा गया और फिर कई अन्य राज्य और केंद्रीय पुलिस बलों के साथ सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ सहित अर्धसैनिक बलों की ओर से भी इसका ऑर्डर दिया गया।
मार्क्समैन की खूबियां ...
- साइड से यह वाहन 90 डिग्री एंगल अटैक पर 10 मीटर की दूरी पर सीधे हिट का सामना कर सकता है।
- 10 मीटर की दूरी पर गोला बारूद के तीन प्रत्यक्ष हिट का सामना कर सकता है।
- एक साथ वाहन के नीचे दो डीएम 51 (जर्मन मानदंड) के ग्रेनेड से सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
- वाहन की अतिरिक्त सुरक्षा : सभी जोड़ों और वेल्डिंग में ओवरलैप होता है। रियर स्टोरेज बॉक्स पिछले दरवाजे का उपयोग करते समय चालक दल को सुरक्षा प्रदान करता है।
- वाहन में सात क्रू फायरिंग पोर्ट हैं।
- बाहर की ओर कॉन्फिगर की गई पिछली सीट और चौड़ी बुलेट प्रूफ खिड़कियां, पीछे बैठे चालक दल के कुल ऑपरेशनल अभिविन्यास की अनुमति देता है।
- वाहन के ऊपर सर्च लाइट लगाई गई है, जिसे ड्राइवर/सह-चालक द्वारा वाहन के अंदर से नियंत्रित किया जा सकता है।
- वाहन के पीछे के क्षेत्र को देखने के लिए ड्राइवर और सह चालक के लिए रियर व्यू कैमरा और एक टीवी स्क्रीन भी है।