पुलिस की मार के डर से नदी में कूदा व्यक्ति, मौत
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राजोरी के नाबन मोहल्ला क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई, जब पुलिस की मार की डर से एक व्यक्ति ने नदी में कूद कर जान दे दी। परिवार वालों ने पुलिस पर उसे नदी में कूदने पर मजबूर करने का आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। एसएसपी ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। घटना शुक्रवार को दोपहर बाद करीब तीन बजे की है।
जानकारी के अनुसार शहर के ठंडी कस्सी निवासी राज कुमार पुत्र देसराज (38) का पिछले कई वर्षों से अपनी पत्नी के साथ कोर्ट में केस चल रहा था। मृतक के भाई ने बताया कि पुलिस ने उसे यह कह कर गिरफ्तार कर ले जाने का प्रयास किया कि कोर्ट ने उसके खिलाफ सम्मन जारी किया है।
वहीं, मौके पर मौजूद कुछ चश्मदीदों ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि पुलिस व्यक्ति को मार कर ले जा रही थी। मृतक को मारने वालों में एक वर्दी में था, जबकि एक ने वर्दी नहीं पहनी थी। उन्होंने उसके सिर पर लाठी से वार किया, तो वह सड़क से नदी की ओर भागा।
पुलिस की आंखों के सामने वह नदी में कूदा, लेकिन उन्होंने उसे बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। देसराज को डूबता देख दोनों पुलिसकर्मी वहां से भाग निकले।
शव सड़क पर रख लगाया जाम
व्यक्ति की मौत की खबर लगते ही भाजपा जिला प्रधान भारत भूषण वैद्य, विहिप जिला अध्यक्ष सत्त शर्मा, भाजपा मंडल प्रधान कपिल सरयाल, भाजपा जिला सचिव संजय दत्त सहित उसके परिवार वाले और क्षेत्र के अन्य लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने शव को पहले शहर के हैमिल्टन पुल पर रखकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
वहीं एडीसी सलीम मलिक, एएसपी जितेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंच कर प्रदर्शनकारियों को शांत करवाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और मृतक के परिवार वालों को सरकारी नौकरी देने व एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग पर अड़े रहे।
उन्होंने शव को दो घंटे बाद राजोरी-पुंछ नेशनल हाईवे स्थित नगेश पुल पर पहुंचाया व पुल जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहीं, जम्मू की तरफ जा रहे राजोरी के एसएसपी डॉ. हसीब मुगल करीब तीन घंटे बाद मौके पर पहुंचे। करीब दो घंटे तक एसएसपी ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया।
एसएसपी ने बताया कि इस संबंध में आरपीसी की धारा 174 यानी रहस्यमय परस्थितियों में मौत के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा परिवार के किसी सदस्य को एसपीओ की नौकरी दी जाएगी। एसएसपी ने देसराज के दोनों बच्चों की पढ़ाई का खर्चा पुलिस द्वारा वहन करने का भी आश्वासन दिया है।
तो कोई नहीं रहा दो बच्चों का सहारा
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि पिछले दस वर्षों से देसराज व उसकी पत्नी के बीच कोर्ट केस चल रहा था। इसके बाद से उनके दोनों बच्चे सात वर्षीय बेटी व तीन वर्षीय बेटा देसराज के पास ही रह रहे थे।
देसराज की मां बुढ़ापे में किसी तरह से उनका पालन पोषण कर रही थी और वह खुद शहर के मुख्य बाजार में रेहड़ी लगाकर गुजर-बसर का इंतजाम करता था। देसराज की मौत के बाद अब न तो कोई कमा कर खिलाने वाला बचा है और न ही मासूम बच्चों की देखभाल करने वाला। उसके तीन अन्य भाई अलग रहते हैं।
पुलिस ने नहीं दिखाई मानवता
मौके पर उपस्थित कुछ महिलाओं ने बताया कि जब व्यक्ति डूब रहा था तो उसने कई बार हाथ ऊपर उठाकर मदद की गुहार भी लगाई। पुलिसकर्मी उसे डूबता देखते रहे, लेकिन किसी ने उसे बचाने का प्रयास नहीं किया।
तैराकी में माहिर था देसराज
मृतक के भाई अश्वनी ने बताया कि देसराज बचपन से ही तैराकी में बहुत माहिर था। यदि पुलिसकर्मियों ने उसके सिर पर लाठी से नहीं मारा होता, तो वह तैर कर खुद अपनी जान बचा सकता था। लाठी की चोट से वह गंभीर रूप से घायल हो गया था, इसलिए वह अपना बचाव नहीं कर पाया।