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Jammu News: मोहनजोदड़ो काल ने वास्तुकला व प्रौद्योगिकी में प्राचीन भारत की दक्षता का प्रदर्शन किया
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-जम्मू विश्वविद्यालय में अमृतकाल व्याख्यान शृंखला के तहत दो दिवसीय कार्यक्रम शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मोहनजोदड़ो का वास्तुशिल्प किसी चमत्कार से कम नहीं था। इसमें सार्वजनिक स्नानघर, डॉकयार्ड जैसी संरचनाओं के माध्यम से वास्तुकला और प्रौद्योगिकी में प्राचीन भारत की दक्षता का प्रदर्शन किया गया। बौधायन, पाणिनि और पिंगल जैसे गणितीय दिग्गजों का योगदान पाइथागोरस प्रमेय, एल्गोरिथम व्याकरण और द्विपद गुणांक की पश्चिमी प्रस्तुतियों से पहले का था। ये बातें जम्मू-कश्मीर उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर दिनेश सिंह ने अमृतकाल व्याख्यान शृंखला में सिंधु घाटी सभ्यता से श्रीनिवास रामानुजन तक: भारतीय गणित का आकर्षक इतिहास, भारतीय गणित की समृद्ध विरासत विषय में व्याख्यान देते हुए कही।
जम्मू विश्वविद्यालय के ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह ऑडिटोरियम में सीमाओं को खत्म कर शिक्षा का विकास करना विषय के तहत दो दिवसीय अमृतकाल व्याख्यान में पहले दिन तीन सत्र हुए। इसमें उप-राज्यपाल के सलाहकार आरआर भटनागर मौजूद रहे। उन्होंने भारत के शानदार अतीत को याद करते हुए समाधान खोजने में समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रो. दिनेश सिंह ने पृथ्वी के आकार की खोज, पाई के मूल्य, आधुनिक त्रिकोणमिति तक आर्यभट्ट, भास्कर और ब्रह्मगुप्त के योगदान पर चर्चा की। वैश्विक ज्ञान प्रणालियों पर भारतीय गणितीय अंतर्दृष्टि के गहरे प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पाइथागोरस का इस्तेमाल भारत में हजारों से सालों से होता रहा है। पाइथागोरस खुद भारत में आए हैं इसके प्रमाण हैं। वे जैन धर्म से काफी प्रभावित हुए जिसके बाद उन्होंने मांस खाना तक छोड़ दिया था।
इसके बाद प्रोफेसर सुधीश पचौरी, पूर्व प्रो-कुलपति, दिल्ली विश्वविद्यालय ने साहित्य की भूमिका पर पुनर्विचार विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत जैसे विभिन्न साहित्यों के बीच समानताओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कैसे भाषा विभाजन लोगों के बीच बाधाएं पैदा कर सकता है। इसके बाद इस्ट्रैक निदेशक बीएन रामकृष्ण ने अंतरिक्ष: अनंत अवसर और अनंत संभावनाएं विषय पर व्याख्यान दिया। जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर उमेश राय ने बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया। छात्रों को अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। पारंपरिक सीमाओं को तोड़ने की वकालत की। दो दिवसीय व्याख्यान का मंगलवार को समापन होगा। ब्यूरो
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-जम्मू विश्वविद्यालय में अमृतकाल व्याख्यान शृंखला के तहत दो दिवसीय कार्यक्रम शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मोहनजोदड़ो का वास्तुशिल्प किसी चमत्कार से कम नहीं था। इसमें सार्वजनिक स्नानघर, डॉकयार्ड जैसी संरचनाओं के माध्यम से वास्तुकला और प्रौद्योगिकी में प्राचीन भारत की दक्षता का प्रदर्शन किया गया। बौधायन, पाणिनि और पिंगल जैसे गणितीय दिग्गजों का योगदान पाइथागोरस प्रमेय, एल्गोरिथम व्याकरण और द्विपद गुणांक की पश्चिमी प्रस्तुतियों से पहले का था। ये बातें जम्मू-कश्मीर उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर दिनेश सिंह ने अमृतकाल व्याख्यान शृंखला में सिंधु घाटी सभ्यता से श्रीनिवास रामानुजन तक: भारतीय गणित का आकर्षक इतिहास, भारतीय गणित की समृद्ध विरासत विषय में व्याख्यान देते हुए कही।
जम्मू विश्वविद्यालय के ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह ऑडिटोरियम में सीमाओं को खत्म कर शिक्षा का विकास करना विषय के तहत दो दिवसीय अमृतकाल व्याख्यान में पहले दिन तीन सत्र हुए। इसमें उप-राज्यपाल के सलाहकार आरआर भटनागर मौजूद रहे। उन्होंने भारत के शानदार अतीत को याद करते हुए समाधान खोजने में समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रो. दिनेश सिंह ने पृथ्वी के आकार की खोज, पाई के मूल्य, आधुनिक त्रिकोणमिति तक आर्यभट्ट, भास्कर और ब्रह्मगुप्त के योगदान पर चर्चा की। वैश्विक ज्ञान प्रणालियों पर भारतीय गणितीय अंतर्दृष्टि के गहरे प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पाइथागोरस का इस्तेमाल भारत में हजारों से सालों से होता रहा है। पाइथागोरस खुद भारत में आए हैं इसके प्रमाण हैं। वे जैन धर्म से काफी प्रभावित हुए जिसके बाद उन्होंने मांस खाना तक छोड़ दिया था।
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इसके बाद प्रोफेसर सुधीश पचौरी, पूर्व प्रो-कुलपति, दिल्ली विश्वविद्यालय ने साहित्य की भूमिका पर पुनर्विचार विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत जैसे विभिन्न साहित्यों के बीच समानताओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कैसे भाषा विभाजन लोगों के बीच बाधाएं पैदा कर सकता है। इसके बाद इस्ट्रैक निदेशक बीएन रामकृष्ण ने अंतरिक्ष: अनंत अवसर और अनंत संभावनाएं विषय पर व्याख्यान दिया। जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर उमेश राय ने बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया। छात्रों को अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। पारंपरिक सीमाओं को तोड़ने की वकालत की। दो दिवसीय व्याख्यान का मंगलवार को समापन होगा। ब्यूरो
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