जानिए हजारों मकानों पर छाया है कैसा खतरा?
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प्रशासन ने बाढ़ की चपेट में आए हजारों मकानों में दरारें आने के बाद इनके ढह जाने की आशंका जताई है। इसके चलते प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों से पूरी एहतियात बरतने और संभल कर रहने की अपील की गई है।
प्रशासन की ओर से आशंका जताई गई है कि जमीन की सतह के नीचे पानी की मूवमेंट होने के चलते अगले तीन महीनों तक बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में इमारतों के क्षतिग्रस्त होने अथवा ढह जाने का खतरा है।
विशेषतौर पर उन इलाकों में जहां कई दिन तक पानी भरा रहा, वहां के लोगों को संभल कर रहना चाहिए और एहतियात बरतनी चाहिए। सड़क एवं भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता सतीश राजधान ने कहा कि अगले तीन महीने खतरनाक साबित हो सकते हैं।
आरएंडबी की पांच टीमें कर रही इमारतों की जांच
ऐसे में लोगों को अपने मकानों में आने वाली दरारों का ध्यान रखना होगा क्योंकि इन दरारों के आने से मकान के ढहना का खतरा हो सकता है। राजधान ने कहा कि बाबा देंब इलाके में बाढ़ का पानी सूख जाने के कई दिन बाद जमीन के नीचे पानी की मूवमेंट होने के कारण दाउद खाकी पुल का एक हिस्सा धंस गया।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की इमारतों की भी जांच की जा रही है। स्कीमस अस्पताल बेमिना के 15 फीसदी हिस्से को भी विभाग की ओर से असुरक्षित करार दिया गया है।
स्कूलों की इमारतों की भी जांच की जा रही है। विभाग की पांच टीमें इमारतों की जांच कर रही हैं। हालांकि, उनका कहना था कि सभी इमारतों की हालत जानने में काफी समय लग सकता है इसके चलते लोगों से अपील की गई है कि वे आवश्यक एहतियात बरतें और मकानों में आने वाली दरारों का ध्यान रखें।