एलएसी पर पीपी-14 के बारे में जानिए अहम बातें, पूर्व सेना अध्यक्ष वीके सिंह ने दी जानकारी
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पूर्व सेना अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय भूतल परिवहन राज्यमंत्री वीके सिंह ने कहा है कि गलवां घाटी की जिस जगह को चीन ने कब्जा करने की कोशिश की थी, दौलत बेग ओल्डी सड़क उसी जगह से सीधी नजर आती है।
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चीन की सामरिक तैयारी और भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन, हमारे सैनिकों ने शहादत देकर चीनी सेना को पीछे धकेला। सिंह सोमवार शाम नमो एप के मंच से ‘व्यू बेयोंड हेडलाइन्स’ विषय पर आयोजित वर्चुअल मीट में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
नमो एप के ट्विटर हैंडल पर जम्मू-कश्मीर समेत देश भर से यूजर्स ने वर्चुअल मीट को देखा और सुना। गलवां घाटी में चीन के कब्जे संबंधी सवाल पर सिंह ने कहा कि गलवां घाटी बहुत बड़ी है। इसका ज्यादातर हिस्सा पहले से चीन के कब्जे में है। 15 जून को जिस जगह हिंसक झड़प हुई, वह स्थान भारतीय सेना का पेट्रोल प्वाइंट 14 है।
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श्योक के पश्चिमी तट से गुजरने वाली दौलत बेग ओल्डी सड़क पर इसी जगह से पूरी नजर पड़ती है। चीन ने इसे कब्जाने की मंशा से अपने टेंट लगा दिए, जिसे हमारे सैनिकों ने बलपूर्वक हटवा दिया। सिंह ने कहा कि हमारे कर्नल संतोष बाबू समेत 20 सैनिक शहीद हुए हैं लेकिन चीन के कम से कम 43 सैनिक मारे गए हैं।
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बड़ा इलाका है नो मैंस लैंड
एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि एलएसी के दोनों तरफ नो मैंस लैंड है। यानी यह जगह पूरी तरह से खाली है। 1962 से चीन इस नो मैंस लैंड को कब्जाने की कोशिश करता आ रहा है। चीन कुटिल है लेकिन इस बार उसने गलवां में कुटिलता की पराकाष्ठा दिखाई। फिर भी उसे पीपी-14 पर मुंह की खानी पड़ी।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के 72 प्रोजेक्ट लगभग पूरे
वर्चुअल मीट में एक सवाल पर सिंह ने कहा कि अविभाजित जम्मू-कश्मीर में सामरिक महत्व की 72 परियोजनाओं का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। इसके रिमाइंडर देते-देते वह साल 2012 में रिटायर हो गए। साल 2014 में मोदी सरकार आने पर इन 72 परियोजनाओं को प्राथमिकता से लिया गया। वर्तमान में 70 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, जबकि दो सड़कों का केवल 70 किलोमीटर बनना शेष है।