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कठुआ में उद्योग के लिए पहला पंजीकरण लंदन से

Tue, 18 Aug 2015 11:58 PM IST
Updated Tue, 18 Aug 2015 11:58 PM IST
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kathua get first registration from london to industry

जम्मू-कश्मीर में उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में जिला कठुआ से शुरू हुई पहल कारगर साबित हुई है। कठुआ जिला में औद्योगिक इकाई स्थापित करने वाले उद्यमियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू की गई है।

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राज्य में अपनी ही तरह की यह पहली ऐसी मुहिम है, जिससे अब उद्यमियों को घर बैठे पंजीकरण की सुविधा मिलेगी, वहीं विभाग के पास भी पंजीकृत इकाइयों का डाटा उपलब्ध रहेगा। जिला औद्योगिक केंद्र कठुआ में हाल ही में ट्रायल के तौर पर पहला पंजीकरण लंदन से दर्ज किया गया।
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फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए जिला औद्योगिक केंद्र कठुआ में अतीफ अहमद ने लंदन से अपने दस्तावेज अपलोड कर आनलाइन आवेदन किया। एमएसएमई डाट जीओवी डाट इन पर उपलब्ध पंजीकरण की इस सुविधा का जल्द ही उद्योग मंत्रालय औपचारिक उद्घाटन भी करने जा रही है।
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इसकी खास बात यह है कि इस सुविधा से जहां उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं उद्यमियों को भी टेबल से टेबल फाइल लेकर जाने और महीनों तक इंतजार नहीं करना होगा।

दफ्तरों के चक्करों से छुटकारा

kathua get first registration from london to industry

अन्य राज्यों से औद्योगिक इकाइयों को पंजीकृत करवाने वाले लोगों के लिए यह सुविधा किसी वरदान से कम नही है चूंकि उन्हें कार्यालय तक जाने की जरूरत नही होगी। और यदि कोई दस्तावेज छूट जाता है या फाइल रुक जाती है तो आवेदक को उपलब्ध यूजर आईडी और पासवर्ड दर्ज कर उसका स्टेटस भी पता चल जाएगा।

आवेदक उस दस्तावेज को फिर आनलाइन जमा करवाकर फाइल को आगे बढ़ा सकेगा। इतना ही नहीं जिला में कुल पंजीकृत इकाइयों, उनके कर्मचारियों के साथ ही अन्य जानकारियों का ब्योरा विभाग के पास उपलब्ध रहेगा।

दूसरी ओर सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचकर गैर पंजीकृत इकाइयां चला रहे उद्यमियों को राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहनों का लाभ लेने में भी सहायता होगी।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार देश में 3.6 मिलियन एमएसएमई यूनिट चल रहे हैं, लेकिन इनमें से मात्र 1.6 मिलियन यूनिट ही पंजीकृत हैं। ऐसे में न तो इन यूनिट को सरकारी मदद मिल पाती है और न ही सरकार के पास इनका डाटाबेस उपलब्ध रहता है। इस सुविधा से दोनों काम एक साथ संभव हो सकेंगे।

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