भाजपा की बढ़ेंगी मुश्किलें, पीडीपी को मिला हथियार, कठुआ कांड के फैसले से आएगा सियासी भूचाल
- घाटी में पनपे आक्रोश को इसी बहाने घटा सकती हैं महबूबा
- भाजपा को विपक्षियों के हमले सहने को रहना होगा तैयार
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कठुआ कांड पर आए फैसले से जम्मू-कश्मीर की सियासत में अगले कुछ दिनों में भूचाल आने की आशंका है। यह मामला जम्मू संभाग में भाजपा के लिए मुश्किलों का पहाड़ खड़ा कर सकता है तो पीडीपी को भगवा ब्रिगेड के खिलाफ हमलावर होने का नया हथियार थमा दिया है। साथ ही घाटी में अपने खिलाफ लोगों में पनपे आक्रोश पर पानी डालने का भी मौका मिल सकता है। जबकि भाजपा को विपक्षियों के हमले सहने होंगे।
दरअसल कठुआ कांड से सीधे तौर पर पीडीपी और भाजपा जुड़ी रहीं। पिछले साल जनवरी महीने में जब यह मामला उछला उसके बाद दोनों गठबंधन सहयोगियों के बीच खाई और बढ़ गई। यह खाई इतनी गहरी हो गई कि भाजपा को अपने दो कद्दावर कैबिनेट मंत्रियों चंद्रप्रकाश गंगा और चौधरी लाल सिंह को कैबिनेट से हटाने का फैसला करना पड़ा। कठुआ कांड को लेकर सीबीआई जांच की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने गए इन दोनों मंत्रियों के मामले ने इतना तूल पकड़ा कि महबूबा ने गठबंधन तोड़ने की धमकी तक दे डाली। भाजपा ने दबाव के आगे झुकते हुए अपने इन दोनों मंत्रियों को हटा दिया था।
चूंकि यह मामला काफी संवेदनशील था। जम्मू के लोगों की इससे भावनाएं जुड़ीं थीं। वे लगातार इसको लेकर आंदोलनरत थे और सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। भाजपा ने सरकार में रहते हुए क्राइम ब्रांच की जांच पर भरोसा जताते हुए सीबीआई जांच की दिशा में कोई पहल नहीं की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फैसले से भाजपा के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़केगा।
लोगों के मन में यह बात आएगी कि यदि भाजपा ने सीबीआई जांच की वकालत की होती तो शायद स्थिति कुछ और हो सकती थी। लोकसभा चुनाव में भाजपा को जम्मू संभाग की दो सीटों पर प्रचंड बहुमत मिला। पिछले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को यहां से 25 सीटें मिलीं। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों में भाजपा को इस फैसले से उपजे गुस्से का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इस वजह से इसकी काट खोजनी होगी।
वहीं, महबूबा को अपनी बात को साबित करने का पूरा मौका मिल गया कि राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा करना चाहिए। भाजपा पर हमला कर घाटी में वह अपने खिलाफ उपजे असंतोष को दूर करने का प्रयास कर सकती हैं। दरअसल भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर घाटी के लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। इसी गुस्से का पार्टी को लोकसभा चुनाव में खामियाजा उठाना पड़ा और उसे घाटी में सभी सीटों से हाथ धोना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी चुनाव में कठुआ कांड मुद्दा बन सकता है। विपक्षी पार्टियां इस पर भाजपा के खिलाफ हमलावर हो सकती हैं। साथ ही चौधरी लाल सिंह का डोगरा स्वाभिमान संगठन भी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगा और लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करेगा कि सत्ता में आने पर सीबीआई जांच कराई जाएगी।
भाजपा को लोगों के गुस्से को डायवर्ट करने की कोशिश करनी होगी
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. हरिओम का मानना है कि इस फैसले से भाजपा को जबरदस्त घाटा होगा। लोगों में स्वाभाविक रूप से भगवा खेमे के खिलाफ गुस्सा पनपेगा। गुस्सा इस बात को लेकर होगा कि उसने लोगों के सीबीआई जांच की मांग का समर्थन नहीं किया। आने वाले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए उसे इस गुस्से को डायवर्ट करने की कोशिश करनी होगी। इसके लिए अनुच्छेद 370, 35-ए या परिसीमन जैसे मुद्दों पर फैसला लेना होगा।