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कड़ा पहरा कराता है कैदखाने का अहसास

Wed, 15 Apr 2015 10:12 AM IST
Updated Wed, 15 Apr 2015 10:12 AM IST
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kashmiri youth don't want to return to homeland

कश्मीर में विस्थापितों को फिर से बसाने को लेकर न सिर्फ सरकारों, अलगाववादियों में मतभेद देखने को मिल रहा है, बल्कि कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों के भी विभिन्न विचार सामने आ रहे हैं। दक्षिणी कश्मीर इलाके की कालोनी में करीब 60 परिवार रहते हैं। वेस्सू में करीब 400 कश्मीरी पंडित हैं, जो या तो सरकारी कर्मचारी हैं या काम के चलते यहां रह रहे हैं।

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इन लोगों के परिवार भी जम्मू अथवा देश के अन्य राज्यों में रहते हैं। इन लोगों का भी मानना है कि अब ऐसे हालात नहीं हैं कि उनके बच्चे अथवा युवा पीढ़ी यहां लौटना चाहे।
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दक्षिण कश्मीर की एक कालोनी के एक युवा का कहना था कि अगर अलग टाउनशिप विस्थापितों के लिए बनाई जाती है, तो इससे न सिर्फ समुदायों के बीच में मतभेद पैदा होंगे, बल्कि नफरत की दीवारें भी खड़ी होंगी। सुरक्षा के साथ बसाने की बात कही जा रही है तो कहां-कहां सुरक्षा घेरा रहेगा। वह कर्मचारी हैं। काम पर जाएंगे, तब कौन सुरक्षा करेगा।

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ऊंची दीवारें, कंटीले तार और कड़ा पहरा

kashmiri youth don't want to return to homeland

ऊंची दीवारें, उसके ऊपर कंटीले तार और गेट पर सुरक्षा का कड़ा पहरा यह सब कैदखाने जैसा लगेगा। इससे असुरक्षा की भावना अधिक बनी रहेगी। कालोनी के ही एक अन्य कश्मीरी पंडित का कहना था कि अगर अलग टाउनशिप बनेगी तो कश्मीरी पंडित अपनी ही मातृभूमि में पर्यटक बनकर रह जाएंगे।

दूसरे समुदाय के लोगों के साथ उनकी दूरियां बन जाएंगी जिसका भविष्य में ज्यादा नुकसान होगा। एक अन्य युवक का कहना था कि वह दिल्ली में नौकरी करते हैं। वहां जैसा माहौल अब कश्मीर में मुमकिन नहीं। यहां रोजगार के साधन नहीं हैं। कश्मीर 20 वर्ष पीछे चला गया है।

वो कश्मीर सिर्फ इसलिए आए हैं कि उनका बुजुर्गों से काफी लगाव है और वो यहां रहते हैं। कश्मीर अब कभी 80 के दशक जैसा शायद ही बन पाए। ऐसे में सरकार के भरोसे यहां आने का रिस्क नहीं उठाया जा सकता।

स्थानीय लोग सहयोग को तैयार

kashmiri youth don't want to return to homeland

कश्मीर के स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकतर कश्मीरी पंडित जो शोपियां और पुलवामा में रहते थे, उनके मकान ऐसे ही हैं। वह चाहें तो वापस आकर अपने घरों में रह सकते हैं। हमारा पूरा सहयोग होगा।

वह चाहते हैं कि कश्मीर जिस भाईचारे के लिए सदियों से जाना जाता रहा है, उसकी मिसाल दोबारा से दुनिया के सामने पेश कर सकें। उनका यह भी कहना है कि जो लोग मकान बेच चुके हैं और लौटना चाहते हैं, ऐसे लोगों को सरकार की ओर से मदद मिलनी चाहिए।

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