{"_id":"5af9d98e4f1c1b894c8b4ab9","slug":"kashmiri-pandits-do-not-have-to-register-for-going-to-kheer-bhavani","type":"story","status":"publish","title_hn":"J&K: क्षीर भवानी मेले में जाने के लिए कश्मीरी पंडितों को पंजीकरण की जरूरत नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
J&K: क्षीर भवानी मेले में जाने के लिए कश्मीरी पंडितों को पंजीकरण की जरूरत नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 15 May 2018 12:21 AM IST
विज्ञापन
kheer bhawani
- फोटो : AMAR UJALA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माता क्षीर भवानी के दर्शन के लिए आने वाले कश्मीरी पंडितों के पंजीकरण संबंधी आदेश से उठे विवाद के बाद सरकार ने डिप्टी कमिश्नर रिलीफ (माइग्रेंट्स) को अटैच कर दिया है। साथ ही मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
विज्ञापन
आपदा प्रबंधन, राहत एवं पुनर्वास मंत्री जावेद मुस्तफा मीर ने बताया कि डिप्टी कमिश्नर रिलीफ (माइग्रेंट्स) की ओर से जारी नोटिस की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। जांच समिति विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी के नेतृत्व में काम करेगी।
विज्ञापन
पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। बिना किसी प्रशासनिक अनुमोदन के नोटिस जारी किए जाने का गंभीर संज्ञान लेते हुए डिप्टी कमिश्नर रिलीफ (माइग्रेंट्स) कुलदीप कृष्ण सिद्धा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित स्टेट सब्जेक्ट हैं और उन्हें क्षीर भवानी मेले के लिए किसी प्रकार के पंजीकरण की जरूरत नहीं है। उन्हें किसी भी धर्मस्थल पर जाने के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। वह यहां के हिस्सा हैं और उन पर किसी प्रकार प्रश्न नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि नोटिस से गलत संदेश गया है। यह अधिकारी के स्तर पर चूक है न कि जानबूझकर किया गया प्रयास। क्षीर भवानी मेले की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
आखिर क्या था मामला ?
दरअसल, इस बार मेले से पूर्व जम्मू कश्मीर सरकार के एक नोटिस ने विवाद खड़ा कर दिया था। जिसमें श्रद्धालुओं को रिलीफ कमिश्नर जम्मू के दफ्तर में 20 मई तक फार्म भरकर यात्रा पर जाने की सहमति देनी थी। इसी बात के जानकारी होते ही महबूबा सरकार की जमकर किरकरी होने लगी। जिसके बाद तुरंत एक मंत्री ने इस नोटिस को वापस ले लिया और संबांधित अधिकारी को अटैच कर जांच के आदेश दे दिए।