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हिंदुओं को बांट रहा कश्मीरी हिंदू श्राइन बिल
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 22 Aug 2014 08:11 PM IST
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श्रीचंद्र चिनार बड़ा अखाड़ा उदासीन ट्रस्ट ने विवादास्पद द कश्मीरी हिंदू श्राइन एंड रिलीजियस प्लेसेस (मैनेजमेंट एंड रेग्यूलेशन) बिल 2009 के मौजूदा प्रावधानों को असंवैधानिक और हिंदुओं को बांटने वाला बताया है। ट्रस्ट ने बिल में जरूरी संशोधनों पर जोर दिया है।
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ट्रस्ट के सचिव स्वामी प्रेम विवेकानंद ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि कश्मीर घाटी में महान उदासीन संत आचार्य श्रीचंद्र जी के नाम पर स्थापित पवित्र धर्मस्थल 450 से अधिक वर्षों से उदासीन पंथ के साधु-संतों द्वारा बिना किसी व्यवधान के संचालित किया जा रहा है।
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लाखों श्रद्धालुओं तथा उदासीनों की श्रद्धा का यह केंद्र है। आश्रम में यात्रियों के लिए धर्मशाला भी है तथा अमरनाथ यात्रा के समय निशुल्क लंगर भी चलाया जाता है। उन्होंने कहा कि शांति से संचालित होने वाले धर्मस्थल की भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता को छीनने वाले इस विवादास्पद बिल का ट्रस्ट विरोध करता है।
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कठिन परिस्थितियों में भी साहस एवं कुशलतापूर्वक अपने अपने धार्मिक एवं सेवा कार्यों को संचालित करने के लिए हमारा हौसला बढ़ाना तो दूर यह बिल हमें इसके लिए दंडित करता है। बिल का उद्देश्य उन लगभग 500 कश्मीरी मंदिरों की रक्षा और उनका संरक्षण करना है जो वर्ष 1990 से पूर्व कश्मीरी पंडितों द्वारा संचालित किए जा रहे थे।
इसका उद्देश्य उन थोड़े हिंदू धर्म स्थानों को तंग करना और सरकारी नियंत्रण में लेना कदापि नहीं था जो आतंकवाद के कठिन समय में भी चलते रहे और जिन्होंने घाटी में हिंदू धर्म की मशाल संकटकाल में भी जलाए रखी।
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि इस निरंकुश व असंवैधानिक बिल को मौजूदा रूप में पारित न करें तथा हमारी तरह से शांति से संचालित हो रहे धर्म स्थानों को इस बिल की परिधि से बाहर रखा जाए।