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जम्मू कश्मीर: ऑनलाइन स्पेस में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी, अब 43% इंटरनेट के जरिये देश-दुनिया से जुड़ीं
Fri, 28 Jul 2023 01:03 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 28 Jul 2023 01:03 PM IST
सार
जम्मू कश्मीर में वर्ष 2019 के बाद प्रदेश में 43.1 फीसदी महिलाएं इंटरनेट का प्रयोग करके देश-दुनिया से जुड़ रही हैं। प्रदेश के शहरों में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या 55 फीसदी, तो ग्रामीण क्षेत्रों में 38.9 फीसदी है।
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Jammu Kashmir
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर की महिलाएं अब पुरुषों की तरह ही देश-दुनिया से जुड़ने को तैयार हैं। प्रदेश में संचार क्रांति के बाद महिलाओं में यह बदलाव देखने को मिला है। साल 2018 तक यहां आठ से 10 फीसदी महिलाएं ही इंटरनेट का प्रयोग करती थीं। वर्ष 2019 के बाद प्रदेश में 43.1 फीसदी महिलाएं इंटरनेट का प्रयोग करके देश-दुनिया से जुड़ रही हैं।
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शहरों में इनकी संख्या 55 फीसदी, तो ग्रामीण क्षेत्रों में 38.9 फीसदी है। इस बदलाव की अहमियत तब बढ़ जाती है, जब 15 से 49 साल के बीच की महिलाओं ने इंटरनेट की ओर तेजी से कदम बढ़ाए हैं।
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जम्मू-कश्मीर में महिलाएं अब घर की डेहरी लांघकर हिमालयी क्षेत्र के इतिहास में नया अध्याय लिख रही हैं। बीते पांच साल में सरकार द्वारा शुरू की गई महिला-उन्मुख योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनने के रास्ते पर ला खड़ा किया है।
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ये भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: तीन साल में लापता हुईं 9765 महिलाएं, गुमशुदगी के मामले में दूसरे स्थान पर प्रदेश
इंटरनेट के माध्यम से देश दुनिया से जुड़ने के चलते उनके सामाजिक ताने बाने पर भी इसका साफ देखा जा सकता है। साल 2019 से 53.8 फीसदी महिलाएं ही घर की साफ सफाई पर ध्यान देती थीं, अब यह आंकड़ा बढ़कर 78.7 फीसदी तक पहुंच चुका है। लोगों से जुड़ने के चलते महिलाओं में जागरूकता आई है।
पहले 24.4 प्रतिशत महिलाओं को नसबंदी कराना पड़ता था। अब इनकी संख्या करीब 21 प्रतिशत तक रह गई है। समाजसेवियों का कहना है कि यह जागरूकता का ही प्रमाण कि महिलाओं में लगभग 4.5 फीसदी नसबंदी के मामले घटे हैं।
Kashmir
- फोटो : बासित जरगर
बेटियों की जन्म दर में हुआ इजाफा
बीते पांच साल में बेटियों की जन्म दर बढ़ी है। साल 2018 तक यहां बेटियों की जन्मदर 1000 पर 923 थी, अब यह बढ़कर 976 हो गई है।
इस सर्वे में हुआ खुलासा
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच के अनुसार जम्मू-कश्मीर के लिए कार्वी डेटा मैनेजमेंट द्वारा एक जुलाई 2019 से दो साल का सर्वे लिया गया है। इसमें महिलाओं में आए बदलाव का असर साफ दिखा है। यह जानकारी प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 18086 घरों की 23037 महिलाओं और 3087 पुरुषों से 12 विभिन्न बिंदुओं पर बातचीत कर एकत्र की गई।
महिलाओं के पास स्मार्टफोन होने की संभावना 20 फीसदी कम
रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं की इंटरनेट तक पहुंच अभी भी काफी कम है। महिलाओं के पास स्मार्टफोन होने की संभावना 20 फीसदी कम है। महिला सशक्तिकरण एक ऐसी अनिवार्यता है, जिसकी अवहेलना किसी भी समाज और देश के विकास की गति को धीमा कर सकती है।
श्रीनगर में जन्म दर हुई कम, इन जिलों में बढ़ी
हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि बडगाम, गांदरबल, राजोरी और श्रीनगर में बेटियों के जन्म दर में कमी आई है। वहीं अनंतनाग, बांदीपोरा, कठुआ और पुंछ में बेटियों की जन्मदर में बड़ा इजाफा देखने को मिला है। इसकी वजह महिलाओं में आई जागरूकता को बताया जा रहा है।
ये भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: स्कूलों में बच्चों को दिया शारीरिक और मानसिक दंड तो तीन साल की जेल, लगेगा 5 लाख जुर्माना
बीते पांच साल में बेटियों की जन्म दर बढ़ी है। साल 2018 तक यहां बेटियों की जन्मदर 1000 पर 923 थी, अब यह बढ़कर 976 हो गई है।
इस सर्वे में हुआ खुलासा
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच के अनुसार जम्मू-कश्मीर के लिए कार्वी डेटा मैनेजमेंट द्वारा एक जुलाई 2019 से दो साल का सर्वे लिया गया है। इसमें महिलाओं में आए बदलाव का असर साफ दिखा है। यह जानकारी प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 18086 घरों की 23037 महिलाओं और 3087 पुरुषों से 12 विभिन्न बिंदुओं पर बातचीत कर एकत्र की गई।
महिलाओं के पास स्मार्टफोन होने की संभावना 20 फीसदी कम
रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं की इंटरनेट तक पहुंच अभी भी काफी कम है। महिलाओं के पास स्मार्टफोन होने की संभावना 20 फीसदी कम है। महिला सशक्तिकरण एक ऐसी अनिवार्यता है, जिसकी अवहेलना किसी भी समाज और देश के विकास की गति को धीमा कर सकती है।
श्रीनगर में जन्म दर हुई कम, इन जिलों में बढ़ी
हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि बडगाम, गांदरबल, राजोरी और श्रीनगर में बेटियों के जन्म दर में कमी आई है। वहीं अनंतनाग, बांदीपोरा, कठुआ और पुंछ में बेटियों की जन्मदर में बड़ा इजाफा देखने को मिला है। इसकी वजह महिलाओं में आई जागरूकता को बताया जा रहा है।
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अस्पताल ले जाते वक्त महिला ने मृत बच्चे को जन्म दिया (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
जिलों में ऐसे बढ़ी बेटियों की जन्मदर
- जिला साल 2018 तक साल 2019 के बाद
- अनंतनाग 807 1177
- बडगाम 1039 843
- बांदीपोरा 875 1000
- बारामुला 872 952
- डोडा 992 959
- गांदरबल 1097 816
- जम्मू 760 892
- कठुआ 804 1100
- किश्तवाड़ 889 1024
- पुलवामा 870 889
- पुंछ 845 1175
- कुपवाड़ा 1074 968
- रामबन 1066 1022
- श्रीनगर 1052 924
- उधमपुर 914 997
- रियासी 907 1000
- सांबा 917 888
- शोपियां 1152 1142
- कुलगाम 1032 1097
- कुपवाड़ा 930 940