शहरी सीमा में संपत्ति कर: विपक्षी मुखर, बोले- लोगों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ, भाजपा ने ओढ़ी खामोशी की चादर
विपक्षी दलों का कहना है कि संपत्ति कर सरकार का एक और तानाशाही फरमान है। अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर पहले से ही लोग परेशान हैं। कोरोना काल से आर्थिक संकट से जूझ रहे लोग अब तक उबर नहीं पाए हैं। ऊपर से सरकार ने कर का एक और बोझ लाद दिया है।
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जम्मू-कश्मीर में संपत्ति कर लगाए जाने का आदेश जारी होने के साथ ही सियासी घमासान शुरू हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि संपत्ति कर सरकार का एक और तानाशाही फरमान है। अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर पहले से ही लोग परेशान हैं। कोरोना काल से आर्थिक संकट से जूझ रहे लोग अब तक उबर नहीं पाए हैं। ऊपर से सरकार ने कर का एक और बोझ लाद दिया है। इस तुगलकी फरमान को तत्काल वापस लेकर वापस लेना चाहिए। भाजपा ने खामोशी की चादर ओढ़ रखी है तो नेकां, कांग्रेस, पीडीपी समेत अन्य विपक्षी दल आदेश के खिलाफ मुखर हैं। विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया तो गंभीर नतीजे होंगे।
सरकार में कोई सुनवाई, दलील या अपील नहीं- नेकां नेता
नेकां के प्रांतीय अध्यक्ष रतन लाल गुप्ता ने संपत्ति कर का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह कर लोगों के खिलाफ है। पहले से ही लोग आर्थिक रूप से परेशान हैं। सरकार ने पहले ही जरूरी खाद्य वस्तुओं पर कर लगाए। गरीबों पर सरकार मार दे रही है। संपत्ति कर से लोग और आर्थिक रूप से परेशान होंगे। लोगों पर कर पर कर का बोझ बढ़ाया जा रहा है। भाजपा सरकार ऐसी सरकार है जिसमें कोई सुनवाई, दलील या अपील नहीं है।
संपत्ति कर आम लोगों पर जुल्म- जुगल किशोर शर्मा
गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि संपत्ति कर पूरी तरह से गलत है। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में पहले से ही जम्मू कश्मीर के लोग परेशान हैं, उस पर ऐसे कर देने के लिए वे तैयार नहीं हैं। जम्मू कश्मीर में पहले से ही कोई उद्योग स्थापित नहीं हैं। बेरोजगारी चरम पर है और उस पर ऐसे कर आम लोगों पर जुल्म है।
भाजपा सरकार ने लोगों पर सिर्फ कर थोपे- रमण भल्ला
प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष रमण भल्ला ने कहा कि जम्मू कश्मीर पहले से ही कोविड के बाद उठा नहीं है। नारको, जीएसटी, ड्रोन आतंक के बाद सरकार ने अब संपत्ति कर लगा दिया है, जबकि उपराज्यपाल ने ऐसे किसी भी कर को न लगाने की बात कही थी। जम्मू कश्मीर की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है। जम्मू कश्मीर में निवेश पर सिर्फ दावे किए गए। जबकि जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ है। कांग्रेस इस कर पुरजोर करती है। ऐसे करों पर चुनाव के बाद विचार किया जाना चाहिए था। भाजपा सरकार आम लोगों पर आए दिन नए कर थोप रही है।