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पंचायती राज के गुर सीखने अब हवाई जहाज में जाएंगे प्रतिनिधि
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जम्मू। संविधान के 73वें संशोधन के तहत त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था समझने के लिए पंचायती नुमाइंदों को अब हवाई जहाज से दूसरे राज्यों में भेजा जाएगा। खासकर दक्षिण भारत जैसे दूरस्थ राज्यों और प्रदेशों में पंच-सरपंच, बीडीसी अध्यक्ष, डीडीसी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष चुने गए नुमाइंदे सरकारी खर्च से हवाई सफर करेंगे। प्रदेश के 40 बीडीसी अध्यक्षों के दल को हाल ही में प्रशिक्षण दौरे पर केरल भेजने के लिए हवाई सफर की सुविधा दी गई है।
प्रदेश में पहली बार पंचायती नुमाइंदों को हवाई जहाज से देश के विभिन्न प्रदेशों की यात्रा करवाने की व्यवस्था की गई है। बीडीसी अध्यक्षों के दौरे के लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सचिव शीतल नंदा ने हवाई यात्रा के लिए आठ लाख रुपये की राशि को मंजूरी दी है।
प्रदेश के पंचायत निदेशक राकेश सरंगल का कहना है कि केरल जैसे राज्य में सड़क अथवा रेल से जाने में तीन से चार दिन का समय लगता है। इसी को देखते हुए हवाई सफर का विकल्प चुना गया है। बीडीसी अध्यक्षों के बाद जिला विकास परिषद के सदस्यों, उपाध्यक्ष व अध्यक्षों को भी प्रशिक्षण दौरों पर भेजने की व्यवस्था इसी तर्ज पर की जाएगी।
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हर जिले से दो प्रतिनिधि भेजे
पंचायत निदेशक राकेश सरंगल के अनुसार प्रदेश के 20 जिलों में से दो-दो बीडीसी अध्यक्षों को केरल दौरे पर भेजा गया है। प्रत्येक जिले से दो बीडीसी अध्यक्षों का चयन निदेशक और जिला पंचायत अधिकारी की तरफ से होता है।
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प्रदेश में पहली बार पंचायती नुमाइंदों को हवाई जहाज से देश के विभिन्न प्रदेशों की यात्रा करवाने की व्यवस्था की गई है। बीडीसी अध्यक्षों के दौरे के लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सचिव शीतल नंदा ने हवाई यात्रा के लिए आठ लाख रुपये की राशि को मंजूरी दी है।
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प्रदेश के पंचायत निदेशक राकेश सरंगल का कहना है कि केरल जैसे राज्य में सड़क अथवा रेल से जाने में तीन से चार दिन का समय लगता है। इसी को देखते हुए हवाई सफर का विकल्प चुना गया है। बीडीसी अध्यक्षों के बाद जिला विकास परिषद के सदस्यों, उपाध्यक्ष व अध्यक्षों को भी प्रशिक्षण दौरों पर भेजने की व्यवस्था इसी तर्ज पर की जाएगी।
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हर जिले से दो प्रतिनिधि भेजे
पंचायत निदेशक राकेश सरंगल के अनुसार प्रदेश के 20 जिलों में से दो-दो बीडीसी अध्यक्षों को केरल दौरे पर भेजा गया है। प्रत्येक जिले से दो बीडीसी अध्यक्षों का चयन निदेशक और जिला पंचायत अधिकारी की तरफ से होता है।