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Jammu News: गड्ढों में बारिश का पानी, डेंगू पहुंचा सकता है हानि
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जम्मू। जम्मू से कठुआ तक निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे इलाकों में इस साल डेंगू के अधिक पनपने का खतरा बना हुआ है। निर्माण कार्यों के चलते कई जगह गड्ढे बन गए हैं, जिससे बरसात में जलभराव की स्थिति हो रही है। यह मच्छरों को पनपने में मदद करेगा। स्वास्थ्य विभाग के आगाह के बाद संबंधित जिला उपायुक्तों को हाईवे पर मच्छरों से निपटने के लिए उचित इंतजाम करने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग की हाल ही में डेंगू पर हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभाग ने निर्माणाधीन हाईवे पर इस सीजन में अधिक मच्छरों के पनपने की आशंका जताई है। हाईवे पर कई ऐसे बिंदु हैं, जहां बरसात में पानी खड़ा हो रहा है। ऐसे पानी में लारवा पैदा होने के सात दिन तक मच्छर पनपना शुरू हो जाते हैं। इसमें जम्मू, सांबा और कठुआ जिले में निर्माणाधीन हाईवे से सटे इलाके अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इस सीजन जनवरी से अब तक 20 डेंगू के मामले मिल चुके हैं। इनमें सर्वाधिक जिला जम्मू से 8, कठुआ, पुंछ, रामबन से 1-1, राजोरी से 3, उधमपुर से 2, कश्मीर और अन्य राज्यों (पर्यटक) से 2-2 मामले हैं।
स्टेट मलेरियालॉजिस्ट डाॅ. डीजे रैना का कहना है कि निर्माणाधीन हाईवे से सटे जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को प्रशासन के साथ मजबूत समन्वय बनाकर मच्छरों के सफाए के लिए उचित अभियान चलाने को कहा गया है। इसमें संबंधित जिला उपायुक्तों के साथ उपयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके साथ नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं की मदद ली जाएगी। वर्ष 2023 में प्रदेश में 6403 डेंगू के मामले मिले थे, जिसमें जिला जम्मू से 63 प्रतिशत के हिसाब से 4035 मामले थे। इसमें 10 पीड़ितों की मौत हुई थी। इससे पहले वर्ष 2022 में 8269 डेंगू के मामले और 18 पीड़ितों की मौत हुई थी।
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ऐसे हो सकता है समाधान
1. निर्माणाधीन स्थलों पर जलभराव को सक्शन मशीनों से निकाला जा सकता है
2. जहां पानी नहीं निकल सकता, उसमें एंटी लारवा स्प्रे किया जाए
3. ऐसे जलभराव वाले स्थलों पर गंबूजिया मछली से लारवा का सफाया कराया जा सकता है।
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एक ही पीड़ित को दो बार डेंगू से अधिक खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार एक ही पीड़ित को अगर नियमित रूप से दो बार डेंगू होता है तो उसके गंभीर होने का अधिक खतरा रहता है। डेंगू के एक से चार टाइप होते हैं। इसमें अगर एक पीड़ित को अलग-अलग टाइप (स्ट्रीम) का डेंगू होता है तो उसके बिल्कुल ठीक होने के बाद भी दोबारा उसके गंभीर होने की आशंका रहती है। पिछले साल प्रदेश में चारों टाइप के डेंगू के मामले मिले थे।
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क्या करें
डेंगू के लक्षण मिलने पर बुखार कम करने के लिए प्राथमिक स्तर पर पैरासिटामोल ले सकते हैं
लंबी सेल्फ मेडिकेशन (खुद से इलाज) न करें और तुरंत डाॅक्टर से चिकित्सा सलाह लें
डेंगू परीक्षण की शीघ्र पुष्टि से ही पीड़ित को उचित इलाज जल्द मिलता है, लक्षणों की जांच करवाएं
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स्वास्थ्य विभाग की हाल ही में डेंगू पर हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभाग ने निर्माणाधीन हाईवे पर इस सीजन में अधिक मच्छरों के पनपने की आशंका जताई है। हाईवे पर कई ऐसे बिंदु हैं, जहां बरसात में पानी खड़ा हो रहा है। ऐसे पानी में लारवा पैदा होने के सात दिन तक मच्छर पनपना शुरू हो जाते हैं। इसमें जम्मू, सांबा और कठुआ जिले में निर्माणाधीन हाईवे से सटे इलाके अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इस सीजन जनवरी से अब तक 20 डेंगू के मामले मिल चुके हैं। इनमें सर्वाधिक जिला जम्मू से 8, कठुआ, पुंछ, रामबन से 1-1, राजोरी से 3, उधमपुर से 2, कश्मीर और अन्य राज्यों (पर्यटक) से 2-2 मामले हैं।
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स्टेट मलेरियालॉजिस्ट डाॅ. डीजे रैना का कहना है कि निर्माणाधीन हाईवे से सटे जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को प्रशासन के साथ मजबूत समन्वय बनाकर मच्छरों के सफाए के लिए उचित अभियान चलाने को कहा गया है। इसमें संबंधित जिला उपायुक्तों के साथ उपयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके साथ नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं की मदद ली जाएगी। वर्ष 2023 में प्रदेश में 6403 डेंगू के मामले मिले थे, जिसमें जिला जम्मू से 63 प्रतिशत के हिसाब से 4035 मामले थे। इसमें 10 पीड़ितों की मौत हुई थी। इससे पहले वर्ष 2022 में 8269 डेंगू के मामले और 18 पीड़ितों की मौत हुई थी।
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ऐसे हो सकता है समाधान
1. निर्माणाधीन स्थलों पर जलभराव को सक्शन मशीनों से निकाला जा सकता है
2. जहां पानी नहीं निकल सकता, उसमें एंटी लारवा स्प्रे किया जाए
3. ऐसे जलभराव वाले स्थलों पर गंबूजिया मछली से लारवा का सफाया कराया जा सकता है।
एक ही पीड़ित को दो बार डेंगू से अधिक खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार एक ही पीड़ित को अगर नियमित रूप से दो बार डेंगू होता है तो उसके गंभीर होने का अधिक खतरा रहता है। डेंगू के एक से चार टाइप होते हैं। इसमें अगर एक पीड़ित को अलग-अलग टाइप (स्ट्रीम) का डेंगू होता है तो उसके बिल्कुल ठीक होने के बाद भी दोबारा उसके गंभीर होने की आशंका रहती है। पिछले साल प्रदेश में चारों टाइप के डेंगू के मामले मिले थे।
क्या करें
डेंगू के लक्षण मिलने पर बुखार कम करने के लिए प्राथमिक स्तर पर पैरासिटामोल ले सकते हैं
लंबी सेल्फ मेडिकेशन (खुद से इलाज) न करें और तुरंत डाॅक्टर से चिकित्सा सलाह लें
डेंगू परीक्षण की शीघ्र पुष्टि से ही पीड़ित को उचित इलाज जल्द मिलता है, लक्षणों की जांच करवाएं