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वेदों में निहित ज्ञान को सहज रूप में स्थापित करना हो हमारा उद्देश्य: सिन्हा
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जम्मू। अंतरराष्ट्रीय वैदिक सम्मेलन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि वर्तमान समय में विरासत को लेकर भारत के नागरिकों में गौरव का भाव आया है। आधुनिक समय में वेदों में निहित ज्ञान को सहज रूप में स्थापित करना हमारा मूल उद्देश्य होना चाहिए। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा को जानें।
सिन्हा ने कहा, जब वेदों की रचना हुई थी तब अलग काल खंड था, आज बदलाव आया है। हमारी युवा पीढ़ी ऐसी प्रतिस्पर्धा दौरा से गुजर रहा है जहां हर दिन नई तकनीक और नवाचार का जन्म हो रहा है। युवा पीढ़ी को अपनी ज्ञान परंपरा में दिलचस्पी जगाने की जरूरत है। हमें छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित कर इस पर काम करना होगा। इस मौके पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. शिवकुमार शर्मा ने कहा कि वेद हमारी विरासत हैं।
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वेद से हमारी परंपराएं सुरक्षित : प्रो.शास्त्री
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री ने कहा कि एकतत्व वेद ही है। वेद से हमारी परंपराएं सुरक्षित हैं। वेद में विज्ञान निहित हैं। सारस्वत अतिथि प्रो. रानी सदाशिव मूर्ति ने कहा कि वेदों में सभी प्रकार का ज्ञान निहित है। सम्मानित अतिथि डॉ. सोमदेव भारद्वाज ने कहा कि राष्ट्र के विचार को प्रमुखता देने में विज्ञान भारती अग्रणी होकर कार्य कर रही है। संस्कृत भाषा में वैज्ञानिक दृष्टि निहित है। जोकि वैदिक परंपरा से ही आई है। परिसर निदेशक प्रो. श्रीधर मिश्र ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा स्कास्ट के कुलपति प्रो. बीनएन त्रिपाठी ने वैदिक सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रथम दिवस में तीन सत्र आयोजित किए गये जिनमें प्रथम सत्र वैदिक ज्ञान की प्रसांगिकता विषय पर आयोजित किया गया।
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वैज्ञानिक मान रहे है संस्कृत, एआई की कोडिंग के लिए सबसे उपयुक्त भाषा
उपराज्यपाल ने कहा कि आज दुनिया के महान वैज्ञानिक मान रहे हैं कि संस्कृत, एआई की कोडिंग के लिए सबसे उपयुक्त भाषा है। वैज्ञानिक कह रहे हैं कि बड़े-बड़े डेटा बेस को विश्लेषण करने के लिए संस्कृत भाषा से बेहतर कोई अन्य भाषा नहीं है। नए एआई को डिजाइन करने में भी संस्कृत के श्लोक की शुरूआत हो रही है। अब तकनीक से जुड़े लोगों की जिम्मेवारी है कि ये तथ्य कक्षाओं तक पहुंचे और हमारी युवा पीढ़ी की इस भाषा का महत्ता समझे और उसमें रुचि ले सके। इतिहास को सुधारने और उसके सही रूप को समाज के सामने रखने की जरूरत है।
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सिन्हा ने कहा, जब वेदों की रचना हुई थी तब अलग काल खंड था, आज बदलाव आया है। हमारी युवा पीढ़ी ऐसी प्रतिस्पर्धा दौरा से गुजर रहा है जहां हर दिन नई तकनीक और नवाचार का जन्म हो रहा है। युवा पीढ़ी को अपनी ज्ञान परंपरा में दिलचस्पी जगाने की जरूरत है। हमें छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित कर इस पर काम करना होगा। इस मौके पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. शिवकुमार शर्मा ने कहा कि वेद हमारी विरासत हैं।
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वेद से हमारी परंपराएं सुरक्षित : प्रो.शास्त्री
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री ने कहा कि एकतत्व वेद ही है। वेद से हमारी परंपराएं सुरक्षित हैं। वेद में विज्ञान निहित हैं। सारस्वत अतिथि प्रो. रानी सदाशिव मूर्ति ने कहा कि वेदों में सभी प्रकार का ज्ञान निहित है। सम्मानित अतिथि डॉ. सोमदेव भारद्वाज ने कहा कि राष्ट्र के विचार को प्रमुखता देने में विज्ञान भारती अग्रणी होकर कार्य कर रही है। संस्कृत भाषा में वैज्ञानिक दृष्टि निहित है। जोकि वैदिक परंपरा से ही आई है। परिसर निदेशक प्रो. श्रीधर मिश्र ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा स्कास्ट के कुलपति प्रो. बीनएन त्रिपाठी ने वैदिक सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रथम दिवस में तीन सत्र आयोजित किए गये जिनमें प्रथम सत्र वैदिक ज्ञान की प्रसांगिकता विषय पर आयोजित किया गया।
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वैज्ञानिक मान रहे है संस्कृत, एआई की कोडिंग के लिए सबसे उपयुक्त भाषा
उपराज्यपाल ने कहा कि आज दुनिया के महान वैज्ञानिक मान रहे हैं कि संस्कृत, एआई की कोडिंग के लिए सबसे उपयुक्त भाषा है। वैज्ञानिक कह रहे हैं कि बड़े-बड़े डेटा बेस को विश्लेषण करने के लिए संस्कृत भाषा से बेहतर कोई अन्य भाषा नहीं है। नए एआई को डिजाइन करने में भी संस्कृत के श्लोक की शुरूआत हो रही है। अब तकनीक से जुड़े लोगों की जिम्मेवारी है कि ये तथ्य कक्षाओं तक पहुंचे और हमारी युवा पीढ़ी की इस भाषा का महत्ता समझे और उसमें रुचि ले सके। इतिहास को सुधारने और उसके सही रूप को समाज के सामने रखने की जरूरत है।