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जम्मू-कश्मीर: प्रदेश में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर 17 फीसदी, पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए बनाई कार्यनीति
Wed, 19 Oct 2022 02:43 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Oct 2022 02:43 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में स्कूल छोड़ने वालों की दर 17 फीसदी है। ऐसे में इस एनआईएलपी जैसी पहल से स्कूल छोड़ने वाले की संख्या में कमी आएगी।
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राजकीय स्कूल, चिनैनी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर 17 फीसदी है। इस दर में कमी लाने के लिए प्रदेश में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से न्यू इंडिया साक्षरता कार्यक्रम (एनआईएलपी) शुरू किया जा रहा है। एनआईएलपी के तहत 15 साल से अधिक आयु वाले स्कूल छोड़ चुके बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाएगा। इन लोगों को पढ़ाने के लिए संसाधन सामग्री तैयार की जा रही है, जिसके लिए श्रीनगर में पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है।
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राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) नई दिल्ली ने संयुक्त रूप से कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें एनआईएलपी के तहत अगले पांच वर्ष के लिए संसाधन सामग्री तैयार की जाएगी, जिसे पुस्तक प्रकाशन के साथ दीक्षा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
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कार्यशाला में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने कहा कि कार्यशाला स्कूल छोड़ने वालों की सहायता करने में बहुत मददगार साबित होगी। जम्मू-कश्मीर में स्कूल छोड़ने वालों की दर 17 फीसदी है। ऐसे में इस एनआईएलपी जैसी पहल से स्कूल छोड़ने वाले की संख्या में कमी आएगी। कार्यशाला में एनसीईआरटी टीम में वरिष्ठ सलाहकार डॉ बानी बोरा, डॉ. यास्मीन अशरफ, जूनियर प्रोजेक्ट फेलो ज्योति तिवारी और शिव श्रीवास्तव शामिल हैं। ये टीम जेकेएससीईआरटी कश्मीर और जम्मू से 20 विषय विशेषज्ञों के काम की निगरानी कर रही है, जो कश्मीरी और डोगरी भाषा में एनआईएलपी संसाधन सामग्री तैयार कर रहे हैं।
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