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प्रदेश में शिशु मृत्युदर में गिरावट
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जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में पिछले एक साल में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में गिरावट दर्ज की गई है। रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया (आरजीआई-एसआरएस) की ओर से जारी की गई सैंपल पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) 2020 की रिपोर्ट में जम्मू कश्मीर में एक वर्ष तक के 1000 बच्चों पर मृत्युदर घटकर 20 से 17 हो गई है, जिसमें तीन की गिरावट है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 28 है। आईएमआर में गिरावट को प्रदश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर संकेतक के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के सहयोग से स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक नवजात देखभाल प्रबंधन को मजबूत बनाया गया है। इस संबंध में व्यापक उपायों में से एक में स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय और नार्वे इंडिया पार्टनरशिप इनिशिएटिव के समर्थन में तैयार की गई एक कार्य योजना शामिल है, जो प्रदेश में आईएमआर को कम करने के लिए रोड मैप के रूप में है। भारत नवजात कार्य योजना (आईएनएपी) सभी स्तर पर कार्यान्वित की जा रही है। प्रदेश में गृह आधारित नवजात देखभाल, टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) गहन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा (आईडीसीएफ) आदि शामिल है। जम्मू कश्मीर में गृह आधारित केयर फार यंग चाइल्ड (एचबीवाईसी) को शुरू किया गया है। मिशन निदेशक एनएचएम यासीम एम चौधरी ने कहा कि सभी स्वास्थ्य विभागों के तालमेल से शिशु मृत्युदर को कम करने में सफलता मिली है। इसे और कम करने के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के सहयोग से स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक नवजात देखभाल प्रबंधन को मजबूत बनाया गया है। इस संबंध में व्यापक उपायों में से एक में स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय और नार्वे इंडिया पार्टनरशिप इनिशिएटिव के समर्थन में तैयार की गई एक कार्य योजना शामिल है, जो प्रदेश में आईएमआर को कम करने के लिए रोड मैप के रूप में है। भारत नवजात कार्य योजना (आईएनएपी) सभी स्तर पर कार्यान्वित की जा रही है। प्रदेश में गृह आधारित नवजात देखभाल, टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) गहन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा (आईडीसीएफ) आदि शामिल है। जम्मू कश्मीर में गृह आधारित केयर फार यंग चाइल्ड (एचबीवाईसी) को शुरू किया गया है। मिशन निदेशक एनएचएम यासीम एम चौधरी ने कहा कि सभी स्वास्थ्य विभागों के तालमेल से शिशु मृत्युदर को कम करने में सफलता मिली है। इसे और कम करने के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं।
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