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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu Kashmir Lok Sabha Election 2024 61 Thousand Employees Are Temporary in Departments Since 1992

Election 2024: बड़ा मुद्दा...प्रदेश में 61 हजार कर्मचारी अस्थायी, 31 साल से हर चुनाव में स्थायी करने का दिलासा

Sat, 06 Apr 2024 01:33 PM IST
शाहरुख खान सतीश वालिया, अमर उजाला, जम्मू
सतीश वालिया, अमर उजाला, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 06 Apr 2024 01:33 PM IST
सार

प्रदेश में 61 हजार कर्मचारी अस्थायी हैं, 31 साल से हर चुनाव में स्थायी करने का दिलासा दिया गया। 1992 में अलग-अलग विभागों में 51 रुपये दैनिक दिहाड़ी पर कर्मचारी भर्ती हुए थे। अभी 300 रुपये तक पहुंचे हैं। जलशक्ति विभाग के कर्मी 651 दिन और सिंचाई विभाग के कर्मचारी डेढ़ साल से प्रदर्शन कर रहे हैं।

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Jammu Kashmir Lok Sabha Election 2024 61 Thousand Employees Are Temporary in Departments Since 1992
प्रदर्शन करते हुए पीएचई कर्मचारी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग विभागों में 61 हजार कर्मचारी अस्थायी हैं। 31 साल से यह कर्मचारी दैनिक वेतनभोगी हैं और तीन दशक में 51 रुपये की दिहाड़ी से 300 रुपये की दिहाड़ी तक पहुंच पाए हैं। कर्मचारियों द्वारा नियमितीरकण के लिए कई बार प्रदर्शन किए जा चुके हैं। 
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जलशक्ति विभाग के कर्मचारियों का प्रदर्शन 651वें दिन में प्रवेश कर गया है। इसी तरह सिंचाई विभाग के कर्मचारियों का प्रदर्शन भी डेढ़ साल से जारी है। बिजली कारपोरेशन के कर्मचारी भी समय-समय पर मांग करते हैं। जैसे ही उग्र प्रदर्शन होता है तो नेता भी प्रदर्शन में भाग लेते हैं और नियमितीकरण का आश्वासन देते हैं।
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सालों से यह कर्मचारी नियमित करने के लिए मांग उठा रहे हैं लेकिन सरकारों का इस तरफ ध्यान नहीं है। अब लोकसभा चुनाव में इन कर्मचारियों को नियमित करने का मुद्दा एक बार फिर उठ सकता है। हालांकि हर बार चुनाव के दौरान नियमितीकरण करने का आश्वासन पार्टियों की ओर से मिलता जरूर है मगर चुनाव जीतने के बाद सरकारें अपना वादा भूल जाती हैं। इस बार फिर अस्थायी कर्मचारी मुखर हैं और पार्टियां कर्मचारियों का समर्थन लेने के लिए आश्वासन देने में जुटी हैं। 
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कांग्रेस, भाजपा सहित सभी क्षेत्रियों दलों की 61 हजार के इस संख्याबल पर नजर है। पार्टियां भली भांति जानती हैं कि 61 हजार कर्मचारियों के परिवार चुनाव में अपना प्रभाव छोड़ सकते हैं। बता दें कि 1992 से प्रदेश में अस्थायी तौर पर कर्मचारियों को रखने की कवायद शुरू हुई। इस दौरान 25 रुपये दिहाड़ी पर कर्मचारियों को रखा गया था। कर्मचारियों को आस थी कि पांच साल बाद पक्के हो जाएंगे। विभागों में काम चलाने के लिए कर्मचारियों को हर साल रखना जारी रहा।
 

क्या हैं मुख्य मांगें
- कर्मचारियों को नियमित किया जाए
- यूटी की तर्ज 500 रुपये प्रति दिन मानदेय जारी हो
- 60 से 70 माह का लंबित वेतन का भुगतान हो
 

किस विभाग में कितने अस्थायी कर्मचारी
मौजूदा समय में कुल कर्मचारियों की संख्या 61161 है। इसमें पीडीडी में 12500, पीएचई में 32500, सिंचाई विभाग में 1096, स्वास्थ्य विभाग में 3065, वन विभाग में 6369, पर्यटन विभाग में 639, ग्रामीण विभाग में 18, सचिवालय में 33, हाउसिंग बोर्ड में 70, एक्साइज विभाग में 01, इस्लामिक कॉलेज श्रीनगर में 67, पशुपालन विभाग में 173, एस्टेट में 413, कला विभाग में 56, उद्यान विभाग में 256 और पीडब्ल्यूडी में 3968 कर्मचारी सेवारत हैं।

 

हर बार आश्वासन ही मिलते, सत्ता में आते ही नेता भूल जाते नियमितीकरण करना
डेलीवेजर यूनियन जलशक्ति, आईएंडएफसी-आरईआई एसोसिएशन के प्रधान शशि कुमार ने कहा कि कर्मचारी 1992 से सेवा दे रहे हैं। अभी तक नियमित नहीं हो पाए हैं। हर बार चुनाव में आश्वासन ही मिलते हैं। पीएचई इंप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट के पदाधिकारी रवि हंस और होशियार सिंह ने कहा कि जब भी प्रदर्शन होता है तो राजनीतिक दल नियमित करने का वादा करते हैं। चुनाव होते ही भूल जाते हैं। लोकसभा का छठी बार चुनाव हो रहा है। जेएंडके इंप्लाइज जाइंट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष बाबू हुसैन मलिक ने कहा कि प्रदेशभर में हजारों कर्मचारी नियमितीकरण की आस लगाए बैठे हैं। कुछ तो सेवा पूरी कर चुके हैं। हर बार चुनाव के दौरान नियमितीकरण की बात कही जाती है। जेएंडके सेंट्रल नान गजटेड इलेक्ट्रिकल इंप्लाइज यूनियन के सचिव सुरजीत खजूरिया ने कहा कि संघर्ष जारी है। अलग-अलग विभागों के कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं। चुनाव के बाद नेता अपना वादा पूरा करें।
 

तय नियमों के अनुसार नियमित हो रहे
मसला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है। कर्मचारियों को बिजली कारपोरेशन में तय नियमों के अनुसार नियमित किया जा रहा है। पहले भी लाभ दिया जा चुका है। - बबिंद्र कौंडल, मुख्य अभियंता, बिजली कारपोरेशन

 

नियमितीकरण का मसला विचाराधीन
कर्मचारियों का नियमितीकरण का मसला सचिवालय में विचाराधीन है। जो भी फैसला आएगा उस आधार पर आगे कार्रवाई शुरू की जाएगी। फिलहाल कोई भी आदेश नहीं मिला है। - संदीप कौंडल, अधीक्षण अभियंता, जलशक्ति विभाग

समस्या का समाधान किया जा रहा है
सिंचाई विभाग में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों की समस्याओं का निदान किया जा रहा है। मामला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है। जैसे ही आदेश होंगे, आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। - राजेंद्र गुप्ता, एक्सइएन, सिंचाई विभाग

 

नियमित करने की सिफारिश की है
2022 में भाजपा की ओर से डेलीवेजरों के मसलों को सुलझाने के लिए कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष को सौंप दी है। इस दौरान 60 हजार के आस-पास डेलीवेजर थे। नियमित करने के लिए सिफारिश की गई है। - शाम लाल, पूर्व मंत्री, भाजपा
 
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