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जम्मू कश्मीर: घाटी में सुरक्षित नहीं कश्मीरी पंडित कर्मचारी, सरकार स्थानांतरण के लिए बनाए नीति
Sat, 10 Dec 2022 02:58 PM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: विमल शर्मा
Updated Sat, 10 Dec 2022 02:58 PM IST
सार
ऑल जम्मू बेस्ड रिजर्व्ड कैटेगरी इंप्लाइज ने कहा कि कर्मचारी घाटी में असुरक्षित हैं। सरकार स्थानांतरण के लिए नीति बनाए। प्रदर्शनकारी अंजना बाला ने कहा कि धरना पर बैठे सात महीने होने वाले हैं। गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी प्रदर्शन का हिस्सा बनें हैं।
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- फोटो : istock
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विस्तार
ऑल जम्मू बेस्ड रिजर्व्ड कैटेगरी इंप्लाइज ने कहा कि उनकी आवाज अब हिमाचल और दिल्ली तक में गूंजने लगी है। प्रदेश सरकार को आने वाले समय में सभी सवालों का जवाब देना पड़ेगा। जिस तरह भाजपा सरकार का हाल दिल्ली और हिमाचल में हुआ है, उसी तरह प्रदेश में भी होगा।
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घाटी में सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। कर्मचारी घाटी में असुरक्षित हैं। सरकार स्थानांतरण के लिए नीति बनाए। प्रदर्शनकारी अंजना बाला ने कहा कि धरना पर बैठे सात महीने होने वाले हैं। गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी प्रदर्शन का हिस्सा बनें हैं।
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लेकिन सरकार को यह परेशानी समझ में नहीं आ रही है। कई नेता कर्मचारियों के नेता बनकर सहानुभूति प्रकट कर रहे थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हो पाया है। नेताओं और प्रशासन के दावे खोखले साबित हुए हैं।
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कुलदीप ने कहा कि उनका वेतन बंद कर दिया गया है। मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, क्योंकि घाटी नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कभी उनके लिए बायोमीट्रिक हाजिरी का नियम निकालती है, तो कभी वेतन बंद करने की बात कहती है।
कुलदीप ने कहा कि रजनी बाला बॉयोमीट्रिक हाजिरी देकर स्कूल में गई थीं। लेकिन वहीं उनकी निर्मम हत्या कर दी गई।