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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu Kashmir High Court: Conscious candidates and those who sit silently are not the same, appeal petitions dismissed in Naib Tehsildar recruitment case

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट: जागरूक अभ्यर्थी और चुप्पी साध कर बैठने वाले एक समान नहीं, नायब तहसीलदार भर्ती मामले में अपील याचिकाएं खारिज

Mon, 31 Jan 2022 01:07 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Mon, 31 Jan 2022 01:07 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश संजय धर की खंडपीठ ने नायब तहसीलदार भर्ती से जुड़े दो आदेशों का सभी आवेदकों को लाभ देने की मांग करती याचिकाओं को खारिज कर दिया।हाईकोर्ट की जम्मू और श्रीनगर विंग में हमिदुल्ला डार बनाम सरकार और इनामुल हक बनाम सरकार के फैसलों का लाभ नायब तहसीलदार भर्ती में शामिल अन्य आवेदकों को भी देने की मांग की गई थी।

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Jammu Kashmir High Court: Conscious candidates and those who sit silently are not the same, appeal petitions dismissed in Naib Tehsildar recruitment case
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि दूर खड़े होकर चुप्पी साधने वालों की तुलना अपने अधिकार के प्रति जागरूक लोगों के साथ नहीं की जा सकती। मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश संजय धर की खंडपीठ ने इस टिप्पणी के साथ नायब तहसीलदार भर्ती से जुड़े दो आदेशों का सभी आवेदकों को लाभ देने की मांग करती याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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कोर्ट ने कहा कि इस मामले में याचिकाएं तब सामने आई हैं, जब कोर्ट ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूक याचिकाकर्ताओं के पक्ष में वर्ष 2016 में दो फैसले दिए। हाईकोर्ट की जम्मू और श्रीनगर विंग में हमिदुल्ला डार बनाम सरकार और इनामुल हक बनाम सरकार के फैसलों का लाभ नायब तहसीलदार भर्ती में शामिल अन्य आवेदकों को भी देने की मांग की गई थी।
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कोर्ट ने कहा कि इन याचिकाओं में दावा किया गया है कि हाईकोर्ट के दो आदेश जारी हुए हैं। वे भी इस आदेश के तहत लाभ के हकदार हैं। ऐसे में उन्हें भी लाभ दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह याचिकाकर्ता पहले तो बाड़बंदी के बाहर बैठे रहे।
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उनकी गहरी निद्रा तब टूटी जब अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में आदेश जारी किए। इससे पूर्व वह अपने भाग्य को स्वीकार कर चुके थे। पहले दिए गए फैसले के आलोक में अदालत ने कहा कि कोर्ट ने केवल उन्हीं याचिकाकर्ताओं को लाभ देने का फैसला सुनाया था, जिन्होंने कोर्ट में अपने दावे और दलीलें पेश की हैं। 

 
नए सिरे से मेरिट व्यवहारिक नहीं
कोर्ट ने कहा कि भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्रों में गलती का तर्क देखते हुए नए सिरे से मेरिट इस मामले में व्यावहारिक नहीं है। पहले से चयनित आवेदकों का सेवाकाल एक दशक से ज्यादा हो चुका है। कई पदोन्नत हो चुके हैं। ऐसे में नए सिरे से मेरिट करने से तकनीकी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। कोर्ट ने सरकार को पदों की उपलब्धता को देखते हुए पूर्ववर्ती याचिकाकर्ताओं को राहत देने के लिए कहा था, जिसका पालन किया गया।

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