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Jammu Kashmir High Court: कांग्रेस की याचिका से जम्मू-कश्मीर में सियासी हलचल, एलजी के अधिकारों पर उठे सवाल

Fri, 18 Oct 2024 01:16 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Fri, 18 Oct 2024 01:16 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में कांग्रेस ने उपराज्यपाल के विधानसभा में पांच विधायकों को नामित करने के अधिकार के खिलाफ याचिका दायर की, मुख्य न्यायाधीश ने विशेष खंडपीठ गठित करने पर सहमति जताई।

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Jammu Kashmir High Court: Congress petition creates political stir in Jammu and Kashmir, questions raised on L
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एलजी मनोज सिन्हा की ओर से विधानसभा में पांच विधायकों को नामित करने के अधिकार मामले के खिलाफ जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। कांग्रेस प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने याचिका दायर कर मांग की है कि सुनवाई के लिए विशेष खंडपीठ गठित की जाए। मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान ने सुनवाई के लिए सोमवार को विशेष खंडपीठ गठित करने पर सहमति जता दी है। 

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याचिकाकर्ता के वकील डीके खजूरिया ने गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पांच विधायकों के नामांकन के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता रविंदर कुमार शर्मा द्वारा दायर याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध करने की मांग की। खजूरिया ने कहा कि मामला अत्यावश्यक प्रकृति का है। खजूरिया ने सर्वोच्च न्यायालय का आदेश भी पढ़ा, जिसमें याचिकाकर्ता को इस मामले में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी गई थी। विशेष उल्लेख के समय याचिकाकर्ता रविंद्र शर्मा भी न्यायालय में उपस्थित रहे।बता दें कि इससे पहले इस मामले में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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मतदान के दिन 8 अक्टूबर को एक याचिका दायर की, जिसमें त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में भाजपा को खेल खेलने से रोकने के लिए विशेष उल्लेख करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि जनादेश ने एनसी-कांग्रेस गठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिया, जिसके परिणामस्वरूप याचिका 14 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष आई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय जाने के लिए कहा था।

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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रावधानों को दी चुनौतीयाचिका में दिसंबर 2023 में संशोधित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जिसमें उपराज्यपाल को पांच विधायकों के नामांकन करने का अधिकार दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि उपराज्यपाल को नामांकन करने से पहले मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह लेनी चाहिए, अन्यथा प्रावधान संविधान की मूल भावना और संरचना के विपरीत हैं। यहां यह उल्लेख करना उचित है कि कांग्रेस द्वारा दायर याचिका अभी भी दोषपूर्ण है और दोष दूर होने के बाद इसे सूचीबद्ध किया जाएगा।

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