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Jammu Kashmir: 100 साल में पहली बार रावण वध होगा डोगरी में, बिल्लू मंदिर रामलीला में हुआ ऐतिहासिक बदलाव

Fri, 11 Oct 2024 05:12 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Fri, 11 Oct 2024 05:12 PM IST
सार

जम्मू के पंजतीर्थी क्षेत्र के बिल्लू मंदिर में चल रही रामलीला में 100 वर्ष में पहली बार रावण वध होगा। रामलीला के संवाद भी डोगरी में होंगे। इसके अलावा राम-रावण और सीता सहित सब कलाकार डोगरा पारंपरिक परिधानों में नजर आ रहे हैं।

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Jammu Kashmir: For the first time in 100 years, Ravana will be killed in Dogri, historical change in Billu Tem
बिल्लू मंदिर रामलीला मंचन का शतक - फोटो : अभिषेक बड़ू

विस्तार

पंजतीर्थी क्षेत्र के बिल्लू मंदिर में चल रही रामलीला में 100 वर्ष में पहली बार रावण वध होगा। रामलीला के संवाद भी डोगरी में होंगे। इसके अलावा राम-रावण और सीता सहित सब कलाकार डोगरा पारंपरिक परिधानों में नजर आ रहे हैं। इसके मंचन के लिए 20 मिनट का समय रखा गया है। रामलीला का मंचन करवाने वाले सरस्वती ड्रामेटिक क्लब के निदेशक ने बताया कि रावण वध न करने के पीछे कारण इन्फ्रास्ट्रक्चर का न होना था। हम जाली तरीके से सीन नहीं दिखाना चाहते थे। इस बार हमने बैकग्राउंड के लिए विशेष आडियो रिकार्ड करवाया है। इसको सुनकर लोगों को युद्ध के महौल का अनुभव होगा। प्रभु राम का तीर इधर-उधर न लगकर सीधा रावण की नाभि में लगे इसके लिए भी तकनीकी बदलाव किए गए हैं।

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सरस्वती ड्रामेटिक क्लब ने 1924 में यहां पहली बार रामलीला का मंचन शुरू किया। इसके बाद से अब तक इसमें कई परिवर्तन आए। डोगरी में संवाद इसका जीवंत उदाहरण है। इस मंच से पहली बार राम और रावण के बीच संवाद सुनने को तो मिलेंगे ही, वो भी स्थानीय भाषा में। इसके लिए कलाकारों ने खूब रिहर्सल की है।
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सरस्वती ड्रामेटिक क्लब के निदेशक अनूप वर्मा के अनुसार समय के अनुसार अब रामलीला के मंचन में बदलाव किया जा रहा है। सदियों से चली आ रही कई परंपराओं को बदला जा रहा है। शुक्रवार की रात 10.30 बजे राम और रावण के बीच होने वाले युद्ध का मंचन भी पहली बार ही होगा। मंचन में परिवर्तन लाने के पीछे एक उद्देश्य क्लब के प्रयासों की डोल्डन जुबली को भी यादगार बनाना है।हीरा लाल वर्मा ने किया रामायण का डोगरी अनुवाद

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क्लब के निदेशक अनूप वर्मा ने बताया कि डोगरी में संवाद के पीछे उनके पिता हीरा लाल वर्मा का विचार था। उन्होंने अथक मेहनत से रामायण का डोगरी में अनुवाद किया। वर्ष 2010 में अनुवाद पूरा होने पर वर्ष 2011 और 12 में डोगरी में लिखी गई रामायण काे प्रकाशित किया गया। अब यह हमारे लिए मार्गदर्शन का काम कर रही है। रामायण का डोगरी में अनुवाद करने के पीछे रामलीला को स्थानीय भाषा में मंचित करने तक का ही उद्देश्य नहीं था बल्कि इसे जन-जन तक स्थानीय भाषा में पहुंचाना था।डोगरी में संवाद के कारण दोगुनी हुई दर्शक संख्या

अनूप वर्मा ने बताया कि रामलीला का मंचन डोगरी संवादों के साथ करना एक प्रयोग था। हमें नहीं पता था कि यह कामयाब होगा या नहीं, लेकिन लोगों की संख्या को देखकर लगता है कि डोगरी संवाद आकर्षण का केंद्र बने हैं। हिंदी में संवाद सुनकर लोग शायद कुछ ऊब चुके थे। अब उन्हें नवीनता दिख रही है।पहली बार राम पगड़ी और चूड़ीदार पायजामे में, सीता सूट में दिखी। 

बिल्लू मंदिर में होने वाले रामलीला मंचन के 100 साल यादगार बनाने के लिए कलाकारों की पोशाकें भी बदली गई हैं। यहां पर अब राम न तो मुकुट में नजर आ रहे हैं और न ही राजशाही पोशाक में। यहां तक की माता सीता भी साड़ी में नहीं दिखाई जा रहीं। राम के लिए अब डोगरी परंपरा के अनुसार ड्रेस तैयार करवाई है जिसमें प्रभु राम कुर्ते और चूड़ीदार पायजामें मे नजर आ रहे हैं। एक भी कलाकार ऐसा नहीं है जिसकी ड्रेस डोगरा परंपरा के अनुसार न हो। लोगों को ये बदलाब खूब पसंद आ रहा है। 

क्यों पड़ा मंदिर का नाम बिल्लू मंदिरबिल्लू मंदिर के नाम से जाने जाते राधे-श्याम मंदिर का निर्माण 1839 में भाई चरण दास द्वारा करवाया गया था। बताया जा है कि मंदिर के पुजारी का नाम बिल्लू था। लंबे समय तक इन्होंने ही मंदिर की देखरेख की। इसके नाम पर ही बाद में यह मंदिर प्रसिद्ध हो गया। अब लोग इसे राधे-श्याम के नाम से कम बिल्लू मंदिर के नाम से ज्यादा जानते हैं।

वर्ष 2025 में देखने को मिलेंगे पांच और बदलाव
रामलीला का मंचन फेसबुक पर लाइव होगा- डुग्गर चैनल शुरू की मांग पूरी हुई तो वहां भी लोग इसे लाइव देख पाएंगे
डिस्को लाइटों का इस्तेमाल होगा, पात्रों पर फोकस रखा जाएगा- साउंड सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा, नई धुनों पर चल रहा काम
तीन माह पहले शुरू होगी होगी रिहसर्ल, फिल्मी कलाकार भी बुलाएंगे

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