{"_id":"66fd04e7348a748f7008ba9d","slug":"jammu-kashmir-election-2024-lajo-devi-casts-her-votes-despite-losing-family-long-queues-of-women-2024-10-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Jammu: गोलेयां दी गल्ल न करेआं पुत्रा, मेरे नूं-पुत्र खाई गे... परिवार खोकर भी वोट डालने पहुंची लाजो देवी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu: गोलेयां दी गल्ल न करेआं पुत्रा, मेरे नूं-पुत्र खाई गे... परिवार खोकर भी वोट डालने पहुंची लाजो देवी
Wed, 02 Oct 2024 02:16 PM IST
शाहरुख खान
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 02 Oct 2024 02:16 PM IST
सार
बहू और बेटे को खोने वाली लाजो देवी करीब 76 वर्ष की हैं। फिर भी वे अपने घर से अकेले निकलीं। लड़खड़ाते पांव के साथ वोट करके आईं। लाजो देवी का बेटा तरसेम लाल कृषि विभाग का कर्मी था।
विज्ञापन
jammu election
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गांव चंदू चक, भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा का अंतिम गांव है। जिला है सुचेतगढ़। यहां के मतदान केंद्र पर पहुंचे तो सामने गली से एक बुजुर्ग महिला चली आ रही थीं। हाथ में एक पर्ची पकड़ रखी थी। लगा कि मतदान करके आई होंगी।
उनसे डोगरी में पूछा कि माता जी पाई आए ओ वोट। जवाब मिला, हां। पूछा कि किन्नी देर ओई गी वोट पांदे। जवाब मिला...पुत्रा मैं इन्नी पढ़ी दी नी। इन्ना पता ऐ के 47 दे इक साल बाद जन्म ओया हा। उनसे पूछा कि माता जी के बदलेआ पिछले कुछ सालें च। इस पर वे चुप हो जाती हैं।
फिर पूछा कि सुनेआ इत्थे पैलां गोले भी पौंदे हे। इस पर वे फफक कर रोने लगीं। बोलीं, पुत्रा गोलेयां दी गल्ल न करेयां। फिर दोहराया, गोलेयां दी गल्ल न करेआं पुत्रा। इतने में पीछे से एक युवक ने आकर बुजुर्ग महिला को सहारा देते हुए पकड़ लिया।
विज्ञापन
पूछा कि माता जी क्यों रो रही हैं। बताया कि 2018 में 18 मई को मेरे बेटे और बहू की पाकिस्तानी गोला गिरने से एक साथ मौत हो गई थी। जब उस युवक से पूछा कि बुजुर्ग के साथ आपका क्या रिश्ता है तो वो भी रोने लगा।
विज्ञापन
उनसे डोगरी में पूछा कि माता जी पाई आए ओ वोट। जवाब मिला, हां। पूछा कि किन्नी देर ओई गी वोट पांदे। जवाब मिला...पुत्रा मैं इन्नी पढ़ी दी नी। इन्ना पता ऐ के 47 दे इक साल बाद जन्म ओया हा। उनसे पूछा कि माता जी के बदलेआ पिछले कुछ सालें च। इस पर वे चुप हो जाती हैं।
विज्ञापन
फिर पूछा कि सुनेआ इत्थे पैलां गोले भी पौंदे हे। इस पर वे फफक कर रोने लगीं। बोलीं, पुत्रा गोलेयां दी गल्ल न करेयां। फिर दोहराया, गोलेयां दी गल्ल न करेआं पुत्रा। इतने में पीछे से एक युवक ने आकर बुजुर्ग महिला को सहारा देते हुए पकड़ लिया।
विज्ञापन
पूछा कि माता जी क्यों रो रही हैं। बताया कि 2018 में 18 मई को मेरे बेटे और बहू की पाकिस्तानी गोला गिरने से एक साथ मौत हो गई थी। जब उस युवक से पूछा कि बुजुर्ग के साथ आपका क्या रिश्ता है तो वो भी रोने लगा।
रोते हुए ही बोला कि दोनों मेरे माता-पिता थे। बात आगे बढ़ने पर युवक ने बताया मेरा नाम अमन है। ये मेरी दादी लाजो देवी हैं। पिता तरसेल लाल और मां मंजीत कौर की गोला गिरने से मौत हो गई थी।
पिछली बार बेटा आया था वोट डलवाने
बहू और बेटे को खोने वाली लाजो देवी करीब 76 वर्ष की हैं। फिर भी वे अपने घर से अकेले निकलीं। लड़खड़ाते पांव के साथ वोट करके आईं। लाजो देवी का बेटा तरसेम लाल कृषि विभाग का कर्मी था। वे कहती है। पिछली बार जब एमएलए का वोट पड़ा था। तब बेटा साथ आया था। आज मैं अकेली आई हूं।
बहू और बेटे को खोने वाली लाजो देवी करीब 76 वर्ष की हैं। फिर भी वे अपने घर से अकेले निकलीं। लड़खड़ाते पांव के साथ वोट करके आईं। लाजो देवी का बेटा तरसेम लाल कृषि विभाग का कर्मी था। वे कहती है। पिछली बार जब एमएलए का वोट पड़ा था। तब बेटा साथ आया था। आज मैं अकेली आई हूं।
अब कुछ माहौल ठीक है
चंदू चक पोलिंग बूथ से बाहर एक बुजुर्ग स्कूल में लगा नक्शा देख रहे हैं। नक्शे पर चीन, पाकिस्तान, भारत के मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, दिल्ली जैसे कई शहरों के नाम हैं। हाथ में लाठी पकड़े हुए एक बुजुर्ग से बात की। क्या बदला बाबा जी पिछले कुछ सालों से। कहते हैं, अब कुछ सुकून है। 95 साल का हो गया हूं। नाम क्या है आपका। मेरा नाम सूबेदार राम सिंह। सेना से रिटायर हूं। इतनी उम्र में भी मतदान करने की हिम्मत कैसे। कहते हैं कि अगर शांति चाहिए तो मतदान तो करना ही पड़ेगा।
चंदू चक पोलिंग बूथ से बाहर एक बुजुर्ग स्कूल में लगा नक्शा देख रहे हैं। नक्शे पर चीन, पाकिस्तान, भारत के मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, दिल्ली जैसे कई शहरों के नाम हैं। हाथ में लाठी पकड़े हुए एक बुजुर्ग से बात की। क्या बदला बाबा जी पिछले कुछ सालों से। कहते हैं, अब कुछ सुकून है। 95 साल का हो गया हूं। नाम क्या है आपका। मेरा नाम सूबेदार राम सिंह। सेना से रिटायर हूं। इतनी उम्र में भी मतदान करने की हिम्मत कैसे। कहते हैं कि अगर शांति चाहिए तो मतदान तो करना ही पड़ेगा।
बार्डर पर बुजुर्गों, महिलाओं में दिखा जोश
सुचेतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सीमांत गांव में दस वर्ष बाद हुए चुनाव को लेकर महिलाओं और बुजुर्गों में जमकर जोश दिखा। गांव चंदू चक में 100 वर्ष की देवा कौर, 95 वर्ष के राम सिंह, सुचेतगढ़ के 98 वर्षीय गुरबचन लाल पैदल चलकर अपने-अपने मतदान केंद्र पर पहुंचे। अब्दाल पंचायत के नई बस्ती मतदान केंद्र पर महिलाओं की लंबी लाइनें दिखीं। सुचेतगढ़ में भी महिलाएं लाइनों में नजर आईं।
सुचेतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सीमांत गांव में दस वर्ष बाद हुए चुनाव को लेकर महिलाओं और बुजुर्गों में जमकर जोश दिखा। गांव चंदू चक में 100 वर्ष की देवा कौर, 95 वर्ष के राम सिंह, सुचेतगढ़ के 98 वर्षीय गुरबचन लाल पैदल चलकर अपने-अपने मतदान केंद्र पर पहुंचे। अब्दाल पंचायत के नई बस्ती मतदान केंद्र पर महिलाओं की लंबी लाइनें दिखीं। सुचेतगढ़ में भी महिलाएं लाइनों में नजर आईं।