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Kathua: बसोहली में बांध किनारे दरक रही जमीन, तीन घरों में आई दरारें, कुछ अन्य मकान भी खतरे में

Fri, 24 Feb 2023 04:45 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 24 Feb 2023 04:45 PM IST
सार

वर्ष 2000 में रंजीत सागर झील का पानी स्टोर किया गया था, जिसके 3 वर्ष बाद लोगों के घरों को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया। तब भी लोगों ने इस संदर्भ में स्थानीय जनप्रतिनिधियों प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाया था

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jammu kashmir: Cracking in some houses near ranjit sagar dam in Basohli kathua
बसोहली - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू संभाग के जिला कठुआ में रंजीत सागर झील से सटे बसोहली के वार्ड 6 में इन दिनों कई परिवार डर के साए में जी रहे हैं। इसका कारण यह है कि लोगों के मकानों में दरारें आ गई हैं और कुछ लोगों के मकान दरकना शुरू हो गए हैं। लोगों के मुताबिक रंजीत सागर झील के जलाशय की दूरी उनके घरों से करीब डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर है और यहां धीरे-धीरे भूमि खिसक रही है और लोगों के घरों को नुकसान पहुंच रहा है।

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वर्ष 2000 में रंजीत सागर झील का पानी स्टोर किया गया था, जिसके 3 वर्ष बाद लोगों के घरों को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया। तब भी लोगों ने इस संदर्भ में स्थानीय जनप्रतिनिधियों प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाया था, लेकिन आज तक इस संदर्भ में कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। वर्ष 2013 में मात्र 3 से 4 घर इस भूस्खलन की जद में थे जबकि वर्ष 2023 में इनकी संख्या लगभग एक दर्जन तक पहुंच गई है। इस बात को लेकर लोगों द्वारा यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं भविष्य में भूस्खलन के कारण पूरा मोहल्ला इसकी जद में न आ जाए।
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वार्ड 6 की निवासी सविता शर्मा ने बताया कि उनके घरों की दीवारों पर दरारें आ चुकी हैं, जिसकी अब तक बीते वर्षो में कई बार अपने निजी खर्च पर मरम्मत करवा चुके हैं। इस बात का भी भय बना हुआ है कि रात के समय मकान भूस्खलन की चपेट में आकर रंजीत सागर झील के जलाशय में न समा जाए। इसी भय के कारण वह अपने दूसरे घर में जाकर रात के समय विश्राम करते हैं।
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वार्ड संख्या 6 के निवासी कार्तिक शर्मा ने बताया कि वर्ष 1995 में घर बनाया था, वर्ष 2013 में घर की दीवारों पर दरारें आना शुरू हो गई जो दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं, घर की मरम्मत पर अब तक लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अब भी उनके घरों में दरारें आ रही हैं। यह समस्या इस वार्ड के एक दो घरों की नहीं बल्कि लगभग एक दर्जन मकानों का यही हाल है। लोग अपनी वर्षों की पूंजी को मकानों की मरम्मत में लगते देख परेशान हो रहे हैं।

स्थानीय शिव कुमार ने बताया कि आवास योजना के तहत घर का निर्माण करवाया था, बह बीपीएल श्रेणी में आते हैं। बड़ी मुश्किल से घर बनाया था। घर की दीवारों पर बढ़ रही दरारों को देखकर इस बात की चिंता सताने लगी है कि इस बार अपने घर की मरम्मत का खर्च कैसे उठा पाएंगे। दरारें इतनी बड़ी हैं कि उनके आर पार आसानी से देखा जा सकता है, जिसे देखकर परिवार के सदस्य सहम जाते हैं।


उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि लोगों के घरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यहां सुरक्षा दीवार और अन्य जरूरी कदम उठाने के लिए कार्रवाई की जाए। संभावना है कि इस भूस्खलन से भविष्य में और भी घर प्रभावित हो सकते हैं। एडीसी बसोहली अजीत सिंह से जब इस संदर्भ में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मीडिया के माध्यम से मामला उनके संज्ञान में आया है। मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया जाएगा, जिसके बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

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