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रिबन तो कटा पर आंखों को रोशनी देने लायक नहीं बन पाया जम्मू का आई बैंक

Thu, 19 Sep 2019 04:39 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Thu, 19 Sep 2019 04:39 PM IST
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jammu gmc eye bank inaugurated months back but not yet started in proper form
जीएमसी जम्मू आई बैंक - फोटो : अमर उजाला
जम्मू जीएमसी में दो माह पहले जोरशोर से आई बैंक (नेत्र) का रिबन काटकर उद्घाटन किया गया। लेकिन अब तक स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू से आई बैंक के लिए लाइसेंस ही जारी नहीं हो पाया है। इससे चाहकर भी लोग दूसरों की आंखों से दुनिया को नहीं देख पा रहे हैं। विभाग के पास करीब सौ लोगों ने कार्नियल प्रत्यारोपण के लिए आवेदन किए हैं। इनकी आंखों में रोशनी नहीं है। ऐसे में आई बैंक शुरू हो जाता तो दर्जनों लोगों के जीवन में कार्नियल प्रत्यारोपण से नई रोशनी आ सकती थी। वहीं, बैंक के लिए जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से भेजी गई कुछ मशीनों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पर पेंच फंसा हुआ है। संबंधित डाक्टरों का कहना है कि नियमों के तहत कुछ मशीनों की खरीद नहीं की जा सकी है। 
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जीएमसी के ओपथालमोलॉजी विभाग में आई (नेत्र) बैंक स्थापित किया गया है। दो माह पहले अस्पताल प्रशासन की ओर से इच्छुक डोनरों के लिए डोनर कार्ड भी जारी किए गए। लेकिन आई बैंक के लाइसेंस को लेकर तेजी नहीं दिखाई गई। पिछले कई माह से यह प्रस्ताव स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू के पास पड़ा हुआ है। आई बैंक शुरू न होने से इच्छुक डोनर नेत्र दान नहीं कर सकते हैं, जबकि जरूरतमंद मरीजों को भी यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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उल्लेखनीय है कि न्यायालय के आदेश के बाद जीएमसी में आई बैंक को शीघ्र शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई गई थी। जीएमसी में फरवरी 2018 में तीन दशक बाद कार्नियल (केराटोप्लास्टी, आंख की पुतली, नेत्र) प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू की गई थी। लेकिन आई बैंक शुरू नहीं किया जा सका। जम्मू-कश्मीर ट्रांसप्लांटेशन आफ ह्यूमन आर्गन अमेंडमेंट एक्ट 2018 के तहत आई बैंक को स्थापित किया जाना है। 
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स्वास्थ्य निदेशालय देगा लाइसेंस-प्रिंसिपल
जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. सुनंदा रैना ने बताया कि आई बैंक को शुरू करने के लिए लगभग औपचारिकताओं को पूरा कर लिया गया है। इसके लिए पर्याप्त ढांचे के साथ अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए गए हैं। स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू को लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है। वहीं, जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के एमडी शिव कुमार गुप्ता का कहना है कि आई बैंक के लिए मशीनों की सप्लाई की गई है। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है।  


क्या है कार्नियल 
कार्नियल (आंखों के बिल्कुल आगे वाली परत) ट्रांसप्लांट की सारी प्रक्रिया ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट के तहत की जाती है। इसमें बिना शिनाख्त वाले शवों या फिर इच्छुक डोनरों का कार्नियल ट्रांसप्लांट कर जरूरतमंद मरीजों में कार्नियल (आंख की पुतली) डालकर उनकी आंखों में रोशनी दिलाई जाती है। व्यक्ति की मौत होने के बाद छह घंटे के भीतर आंख से कार्नियल लिया जा सकता है, जो 4-5 दिन तक संरक्षित रखा जा सकता है। 
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