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Jammu News: बाबा जित्तो व बुआ कौड़ी के दरबार में नतमस्तक हुए 51 हजार श्रद्धालु
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झिड़ी मेले का आनंद उठाते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : zhiri mela
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उत्तर भारत का प्रसिद्ध झिड़ी मेला छठे दिन भी जारी, सांस्कृतिक कार्यक्रम बने आकर्षण का केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। झिड़ी मेला में मंगलवार को छठे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आए करीब 51 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा जित्तो और बुआ कौड़ी के दरबार में हाजिरी लगाई। वहीं, अबतक श्रद्धालुओं का आंकड़ा साढ़े चार लाख से अधिक पहुंच गया है।
मेले में मंगलवार को भी पांव रखने की जगह नहीं थी। दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। देर रात तक मेले में भीड़ देखने को मिली। अनुमान लगाया जा रहा है कि मेले के अंतिम दिन रविवार को इससे ज्यादा भीड़ जुटेगी। इसके लिए प्रशासन की ओर से प्रबंध किए गए हैं।
झिड़ी देव स्थान रंग बिरंगी लाइटों से जगमगा रहा है। मेला 24 नवंबर तक चलेगा। मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग के दोनों ओर दुकानें सजी हैं। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। टूरिज्म विभाग की ओर से लगाई गई स्क्रीन में प्रदेश की संस्कृति को दर्शाया जा रहा है।
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11 दिवसीय मेले के दौरान सात लाख से ज्यादा आगंतुकों की आमद झिड़ी गांव को एक चहल-पहल भरे बाजार में बदल देती है। यह स्थानीय किसानों, खास तौर पर गन्ना उत्पादकों के लिए आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करता है। मेले का एक मुख्य आर्थिक लाभ यह है कि यह किसानों को सीधे बिक्री का अवसर मिलता है।
यह क्षेत्र अपने गन्ना उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ती है, बल्कि खेती की परंपराओं के साथ सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देकर स्थानीय कृषि पद्धतियों को भी मजबूती मिलती है। मेले के दौरान प्राप्त दृश्यता स्थानीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता की पहचान को बढ़ा सकती है। जिससे किसानों में अपने शिल्प के प्रति गर्व की भावना पैदा होती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। झिड़ी मेला में मंगलवार को छठे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आए करीब 51 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा जित्तो और बुआ कौड़ी के दरबार में हाजिरी लगाई। वहीं, अबतक श्रद्धालुओं का आंकड़ा साढ़े चार लाख से अधिक पहुंच गया है।
मेले में मंगलवार को भी पांव रखने की जगह नहीं थी। दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। देर रात तक मेले में भीड़ देखने को मिली। अनुमान लगाया जा रहा है कि मेले के अंतिम दिन रविवार को इससे ज्यादा भीड़ जुटेगी। इसके लिए प्रशासन की ओर से प्रबंध किए गए हैं।
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झिड़ी देव स्थान रंग बिरंगी लाइटों से जगमगा रहा है। मेला 24 नवंबर तक चलेगा। मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग के दोनों ओर दुकानें सजी हैं। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। टूरिज्म विभाग की ओर से लगाई गई स्क्रीन में प्रदेश की संस्कृति को दर्शाया जा रहा है।
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11 दिवसीय मेले के दौरान सात लाख से ज्यादा आगंतुकों की आमद झिड़ी गांव को एक चहल-पहल भरे बाजार में बदल देती है। यह स्थानीय किसानों, खास तौर पर गन्ना उत्पादकों के लिए आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करता है। मेले का एक मुख्य आर्थिक लाभ यह है कि यह किसानों को सीधे बिक्री का अवसर मिलता है।
यह क्षेत्र अपने गन्ना उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ती है, बल्कि खेती की परंपराओं के साथ सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देकर स्थानीय कृषि पद्धतियों को भी मजबूती मिलती है। मेले के दौरान प्राप्त दृश्यता स्थानीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता की पहचान को बढ़ा सकती है। जिससे किसानों में अपने शिल्प के प्रति गर्व की भावना पैदा होती है।