{"_id":"65c00caa066ba919e8004366","slug":"jammu-culture-serial-jammu-news-c-10-jam1008-296131-2024-02-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: मेरा घर मेरा सपना में दिखा मजदूरों का संघर्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: मेरा घर मेरा सपना में दिखा मजदूरों का संघर्ष
विज्ञापन
संडे थियेटर शृंखला के तहत नटरंग की ओर से हुआ नाटक का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग ने अपने स्टूडियो थियेटर में रविवार को संडे थियेटर शृंखला में हिंदी नाटक मेरा घर मेरा सपना का मंचन हुआ। यह नाटक उन मजदूरों की दुर्दशा पर आधारित है, जो दूसरों के लिए घर बनाते हैं, लेकिन उनका अपनी छत का सपना जीवनभर पूरा नहीं हो पाता है।
नाटक नाटकीय रूप से एक ऐसे दृश्य से शुरू होता है, जहां मजदूरों को एक आवास परियोजना पर काम करते हुए दिखाया गया। मजदूर के रूप में काम कर रहा एक युवा जोड़ा जीवनभर साथ रहने और घर बनाने के सपने के साथ शादी के बंधन में बंधता है। उनका संघर्ष जारी रहता है। हालात तब और खराब हो जाते हैं, जब इस बेघर जोड़े को एक बच्चा होता है। एक दिन पुलिस दल तलाशी लेने के लिए उनके घरों में घुसता है और घर में पड़ा सारा सामान बाहर फेंक देता है और महिला के साथ भी दुर्व्यवहार करता है। कानून जब भी किसी को बचाना चाहता है तो शहर की ऐसी अनधिकृत बस्तियों में ऐसा होता है।
इस बीच सांप्रदायिक दंगों के कारण कई घर नष्ट हो गए हैं और लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। महिला राहत शिविर छोड़कर अपनी पुरानी कॉलोनी में अपना घर बसाने की सोचती रहती है, जहां सभी धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं। लेकिन वह आदमी यह कहकर उसकी बात नहीं मानता कि अब उसके धर्म के लोग उस कॉलोनी में नहीं रहते और ऐसे में वह अपने धर्म के लोगों के बीच ही घर बनाएगा। अनधिकृत कॉलोनी में रहने के कारण एक दिन पुलिस उन्हें कॉलोनी से बाहर निकालने के लिए बुलडोजर लेकर पहुंचती है। यहां दंपती ने दृढ़ता से निर्णय लिया कि वे अपना घर खाली नहीं करेंगे और कॉलोनी के अन्य सभी निवासियों को अन्याय के खिलाफ एकजुट होने और न्याय मिलने तक लड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। नाटक में एक नया मोड़ तब आता है जब वंचित लोगों की अक्रामकता भड़क उठती है और अधिकारी उन्हें समायोजित करने के लिए सहमत हो जाते हैं। नाटक में प्रदर्शन करने वाले नटरंग युवा कलाकारों में संकेत भगत, विशाल शर्मा, चैतन्य शेखर, वंदना ठाकुर, कुशल भट्ट और महक सिंह शामिल थे। नाटक का निर्माण, निर्देशन व लाइट्स को नीरज कांत ने डिजाइन व निष्पादित किया। नाटक का संगीत महक चिब ने दिया और शो का संचालन मोहम्मद यासीन ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग ने अपने स्टूडियो थियेटर में रविवार को संडे थियेटर शृंखला में हिंदी नाटक मेरा घर मेरा सपना का मंचन हुआ। यह नाटक उन मजदूरों की दुर्दशा पर आधारित है, जो दूसरों के लिए घर बनाते हैं, लेकिन उनका अपनी छत का सपना जीवनभर पूरा नहीं हो पाता है।
नाटक नाटकीय रूप से एक ऐसे दृश्य से शुरू होता है, जहां मजदूरों को एक आवास परियोजना पर काम करते हुए दिखाया गया। मजदूर के रूप में काम कर रहा एक युवा जोड़ा जीवनभर साथ रहने और घर बनाने के सपने के साथ शादी के बंधन में बंधता है। उनका संघर्ष जारी रहता है। हालात तब और खराब हो जाते हैं, जब इस बेघर जोड़े को एक बच्चा होता है। एक दिन पुलिस दल तलाशी लेने के लिए उनके घरों में घुसता है और घर में पड़ा सारा सामान बाहर फेंक देता है और महिला के साथ भी दुर्व्यवहार करता है। कानून जब भी किसी को बचाना चाहता है तो शहर की ऐसी अनधिकृत बस्तियों में ऐसा होता है।
विज्ञापन
इस बीच सांप्रदायिक दंगों के कारण कई घर नष्ट हो गए हैं और लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। महिला राहत शिविर छोड़कर अपनी पुरानी कॉलोनी में अपना घर बसाने की सोचती रहती है, जहां सभी धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं। लेकिन वह आदमी यह कहकर उसकी बात नहीं मानता कि अब उसके धर्म के लोग उस कॉलोनी में नहीं रहते और ऐसे में वह अपने धर्म के लोगों के बीच ही घर बनाएगा। अनधिकृत कॉलोनी में रहने के कारण एक दिन पुलिस उन्हें कॉलोनी से बाहर निकालने के लिए बुलडोजर लेकर पहुंचती है। यहां दंपती ने दृढ़ता से निर्णय लिया कि वे अपना घर खाली नहीं करेंगे और कॉलोनी के अन्य सभी निवासियों को अन्याय के खिलाफ एकजुट होने और न्याय मिलने तक लड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। नाटक में एक नया मोड़ तब आता है जब वंचित लोगों की अक्रामकता भड़क उठती है और अधिकारी उन्हें समायोजित करने के लिए सहमत हो जाते हैं। नाटक में प्रदर्शन करने वाले नटरंग युवा कलाकारों में संकेत भगत, विशाल शर्मा, चैतन्य शेखर, वंदना ठाकुर, कुशल भट्ट और महक सिंह शामिल थे। नाटक का निर्माण, निर्देशन व लाइट्स को नीरज कांत ने डिजाइन व निष्पादित किया। नाटक का संगीत महक चिब ने दिया और शो का संचालन मोहम्मद यासीन ने किया।
विज्ञापन