फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu and Kashmir: Wyeth Taruwah celebrated after decades on the banks of river Jhelum, special worship of Kashmiri Pandits

जम्मू-कश्मीर: झेलम नदी के घाट पर दशकों बाद मनाया गया व्येथ तरुवाह, कश्मीरी पंडितों ने की विशेष पूजा

Sun, 19 Sep 2021 12:03 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sun, 19 Sep 2021 12:03 AM IST
सार

शिवरात्रि के दिन भी यही से पानी का घड़ा भरके ले जाय करते थे और मंदिरों में भी इसी नदी का पानी इस्तेमाल में लाया जाता था। लोग इसी का पानी पीते थे पर आज इतने सालों बाद यह देख के दुख हुआ।

विज्ञापन
Jammu and Kashmir: Wyeth Taruwah celebrated after decades on the banks of river Jhelum, special worship of Kashmiri Pandits
Kashmiri Pandit

विस्तार

कश्मीर के इतिहास में अहम भूमिका रखने वाली झेलम नदी का शनिवार को जन्म दिन (व्येथ तरुवाह) मनाया गया। बताया जाता है कि कश्मीरी पुराणों के अनुसार व्येथ तरुवाह के दिन झेलम नदी घाटी में उत्पन्न हुई थी। श्रीनगर के डाउन टाउन के हब्बा कदल इलाके में पुर्शियार घाट पर विशेष पूजा अर्चना कर दीये भी जलाए गए। इसमें बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग शामिल हुए। कश्मीर के कमिश्नर पीके पोल और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

विज्ञापन


कई वर्षों बाद भाग लेकर कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग काफी उत्साहित दिखे। कई लोगों ने झेलम नदी की मौजूदा हालत पर अफसोस भी व्यक्त किया। मीना हंडू ने बताया कि वह इसी हब्बा कदल इलाके में रहा करती थी और शुरू से ही हम इस मां झेलम का बहुत आदर सत्कार करते थे। हम इस नदी को हिमालय से निकली अपनी मां समझते हैं। आज यहां इस नदी को प्रदूषित देख काफी दुख हुआ क्योंकि इस नदी के पानी को हम काफी पवित्र मानते थे।
विज्ञापन


मीना ने बताया कि शिवरात्रि के दिन भी यही से पानी का घड़ा भरके ले जाय करते थे और मंदिरों में भी इसी नदी का पानी इस्तेमाल में लाया जाता था। लोग इसी का पानी पीते थे पर आज इतने सालों बाद यह देख के दुख हुआ। उन्होंने बताया कि आज के दिन को हम वितस्ता माता (झेलम नदी) का जन्म दिन मनाते थे और हर कोई पंडित यहाँ आके दिया जलाता था। और अपने तौर पर पुछा अर्चना अपने अपने नदी के घाट पर की जाती थी। आज एक बार हमने सोचा कि कई वर्षों बाद एक बार फिर से वितस्ता माता का जन्म दिन उसी तरह से मनाएं जैसे पहले मनाया करते थे। काफी ख़ुशी हुई यह देख कर।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- डीजीपी: कश्मीर में आतंकियों को नहीं मिल रहे नए युवा, सोच-समझकर आगे बढ़ रहे यहां के बच्चे


गौरतलब है कि इस अवसर पर कश्मीर के डिव कॉम पी के पोल ने कहा कि हर एक मुल्क के हर खित्ते की तरक्की में प्राकृतिक संसाधनों अहमियत रहती है जिसमें वहां की मिट्टी, आबोहवा और पानी शामिल हैं। पानी दरिया लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि इंडस सिविलाईजेशन इसी सिंधु नदी के किनारे बैठी थी। जेहलम नदी की कश्मीर की अर्थव्यवस्था में काफी हम भूमिका रही है।

  उन्होंने कहा कि यहाँ का एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर और अन्य इंडस्ट्रीज इसी पर निर्भर है। करीब 75 लाख की आबादी इस नदी व् इसकी सहायक नदियों से पानी लेती हैं। आज का उत्सव जो है जो उसका मकसद यह है कि हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों एहमियत जाननी चाहिए और इसके प्रति अपनी श्रद्धा बनाए रखें। साथ ही उसको किस तरह साफ सुथरा रखें उस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।      

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed