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अगले पांच सालों में बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बन जाएगा जम्मू कश्मीर

Mon, 21 Mar 2016 01:52 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 21 Mar 2016 01:52 PM IST
सार

  • 9344.50 मेगावाट पनबिजली उत्पादन करने के रोड मैप को हरी झंडी
  • राज्य, केंद्र सेक्टर और लघु पनबिजली परियोजनाओं से बदलेंगे हालात 

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Jammu and Kashmir  will not be required to buy power from 2021
9344.50 मेगावाट पनबिजली उत्पादन करने के रोड मैप को हरी झंडी

विस्तार

बिजली के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर की सरकार ने अगले पांच साल में आत्मनिर्भर बनने का रोड मैप तैयार कर लिया है। वर्ष 2021 से जम्मू-कश्मीर को बिजली खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रियासत न केवल बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगी, बल्कि विकास की राह में भी बड़ा रोल निभाएगी।

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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन की हाल ही में राज्यपाल एनएन वोहरा की अध्यक्षता में हुई बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की बैठक में अगले पांच सालों में करीब 9344.50 मेगावाट पनबिजली उत्पादन करने के रोड मैप को हरी झंडी दे दी गई है। 
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रोड मैप के अनुसार राज्य सेक्टर में करीब 15 पनबिजली परियोजनाओं से 6263 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। सेंट्रल सेक्टर की पांच परियोजनाओं से 1859 मेगावाट, आईपीपी सेक्टर में 850 मेगावाट व लघु पनबिजली परियोजनाओं में 372 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। 
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मुख्य पनबिजली परियोजनाएं, जिनका निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाना है, उनमें 1856 मेगावाट क्षमता की सावलकोट, 520 मेगावाट की कावर, 1020 मेगावाट क्षमता की बरसर परियोजना के अलावा सेंट्रल सेक्टर 330 मेगावाट की किशनगंगा परियोजना शामिल है। आईपीपी प्रोजेक्ट में 850 मेगावाट की रटली पनबिजली परियोजना, 600 मेगावाट की कीरू परियोजना समेत अन्य कई परियोजनाएं शामिल हैं। 

सालाना पांच हजार करोड़ की बिजली की खरीद हो रही

Jammu and Kashmir  will not be required to buy power from 2021
रियासत जम्मू कश्मीर में वर्तमान में रियासती सरकार सालाना करीब पांच हजार करोड़ की बिजली खरीदकर भी बिजली की मांग को पूरा नहीं कर पा रही है। बिजली की मांग 2800 मेगावाट तक हो चुकी है जबकि पनबिजली उत्पादन ओर बिजली खरीदकर भी 1800 मेगावाट के आसपास ही उपलब्ध हो पा रहा है। 

ऐसे में अगर रोड मैप के हिसाब से पांच सालों में रियासत बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गई तो फिर न केवल बिजली की खरीद में जाने वाली पांच हजार करोड़ की राशि बचेगी बल्कि बिजली बेचकर हजारों करोड़ रुपये रियासती सरकार कमा भी पाएंगी। 
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