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जम्मू-कश्मीर: इन तीन जिलों को मिलेगा कॉमन इन्क्यूबेशन फैसिलिटी सेंटर
Wed, 26 May 2021 01:12 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Wed, 26 May 2021 01:12 PM IST
सार
केंद्र ने दी मंजूरी, दूध उत्पाद पर ध्यान केंद्रित, बढ़ेगी पशुपालकों की आय।
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डेयरी फार्म
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में तीन कॉमन इन्क्यूबेशन फैसिलिटी सेंटरों की स्थापना को मंजूरी दी है। अनंतनाग, बारामुला और जम्मू में 7.81 करोड़ रुपये की लागत से यह सेंटर बनेंगे। यह जानकारी कृषि उत्पादन एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव नवीन कुमार चौधरी ने दी। नवीन चौधरी ने बताया कि अनंतनाग में पहले इन्क्यूबेशन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसकी अनुमानित लागत 2.70 करोड़ रुपये है।
इसमें मछली और मत्स्य आधारित उत्पादों के प्रसंस्करण की सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में मछली के उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निर्यात में कई गुना वृद्धि करने का लक्ष्य रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि दूसरा केंद्र जम्मू के नरवाल में स्थापित किया जाएगा। डेयरी उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए 2.68 करोड़ खर्च होंगे। सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और जम्मू-कश्मीर के दूध अधिशेष क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है।
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: पारा चढ़ते ही बिजली कटौती करने लगी परेशान, छूटने लगे पसीने
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उन्होंने कहा कि इस सुविधा का फोकस दूध आधारित उत्पादों जैसे मक्खन, पनीर, घी, चॉकलेट के उत्पादन और वैज्ञानिक तर्ज पर उत्पादों की पैकेजिंग और विपणन के माध्यम से मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर जल्द ही दूध आधारित उत्पादों के महत्वपूर्ण स्थलों में से एक में बदला जाएगा।
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इसमें मछली और मत्स्य आधारित उत्पादों के प्रसंस्करण की सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में मछली के उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निर्यात में कई गुना वृद्धि करने का लक्ष्य रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि दूसरा केंद्र जम्मू के नरवाल में स्थापित किया जाएगा। डेयरी उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए 2.68 करोड़ खर्च होंगे। सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और जम्मू-कश्मीर के दूध अधिशेष क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है।
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उन्होंने कहा कि इस सुविधा का फोकस दूध आधारित उत्पादों जैसे मक्खन, पनीर, घी, चॉकलेट के उत्पादन और वैज्ञानिक तर्ज पर उत्पादों की पैकेजिंग और विपणन के माध्यम से मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर जल्द ही दूध आधारित उत्पादों के महत्वपूर्ण स्थलों में से एक में बदला जाएगा।