{"_id":"60efdfcaac55ad3cf81a0152","slug":"jammu-and-kashmir-news-even-after-one-and-half-years-rules-are-not-fixed-for-economic-offenses-wing","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर: डेढ़ साल बाद भी एंटी करप्शन ब्यूरो के आर्थिक अपराध विंग के लिए नियम तय नहीं ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर: डेढ़ साल बाद भी एंटी करप्शन ब्यूरो के आर्थिक अपराध विंग के लिए नियम तय नहीं
Thu, 15 Jul 2021 12:42 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Thu, 15 Jul 2021 12:42 PM IST
सार
एंटी करप्शन ब्यूरो के निदेशक आनंद जैन का कहना है कि विंग में 20 लोग आ गए हैं। मामलों की जांच विंग ने शुरू कर दी है। हमारे पास जो आर्थिक अपराध के गंभीर मामले हैं, उनकी जांच करवा रहे हैं, लेकिन अभी तक इसके रूल तय नहीं किए गए हैं, जोकि जीएडी विभाग ने करने हैं। रूल बनने से इसका अलग थाना होगा और इसमें फिर स्वतंत्र रूप से केस दर्ज होने लगेंगे। अभी फिलहाल एसीबी थाने में ही केस दर्ज हो रहे हैं।
विज्ञापन
एंटी करप्शन ब्यूरो
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एंटी करप्शन ब्यूरो के आर्थिक अपराध विंग को बने डेढ़ साल हो गया, लेकिन अभ तक इसके लिए नियम तय नहीं हो पाए। न ही इसमें पूरा स्टाफ नियुक्त किया गया है। इसकी वजह से आर्थिक अपराध के मामले अब भी एंटी करप्शन ब्यूरो में दर्ज हो रहे हैं। साथ ही मामलों की जांच भी उस तरह से नहीं हो पा रही, जैसी होनी चाहिए थी। हालांकि विंग ने मामलों की जांच करना शुरू कर दिया है, लेकिन रूल तय न होने से केस दर्ज नहीं हो पा रहे, क्योंकि विंग के पास अपना थाना ही नहीं है।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार भ्रष्टाचार में आर्थिक अपराधों के मामलों की जांच को लेकर उक्त विंग का गठन किया गया था। मार्च 2020 में 56 पदों वाले विंग को मंजूरी दी गई। इसमें एक एसपी, तीन डीएसपी, 10 इंस्पेक्टरों, 10 सब इंस्पेक्टरों, 20 कांस्टेबल, एक आर्डलरी, पांच स्टेनोग्राफर के पद सृजित किए गए, लेकिन अभी तक इस विंग में एसपी को छोड़कर सिर्फ 20 पद ही भरे गए हैं। बाकी के पद अभी तक नहीं भरे गए।
विज्ञापन
बता दें कि क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराध गंभीर होते हैं। इस तरह के मामलों की जांच के लिए उक्त विंग को बनाया गया, लेकिन अभी तक यह अस्तित्व में नहीं आ रहा।
विज्ञापन