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जम्मू-कश्मीर: अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में कम हुईं पथराव की घटनाएं, पिछले छह माह में सिर्फ एक की गई जान
Wed, 29 Jul 2020 10:59 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 29 Jul 2020 10:59 PM IST
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पिछले वर्ष पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी कमी आई है। 2020 के पहले छह माह में हुई घटनाओं की बात करें तो 2018 में हुई 944 घटनाओं की तुलना में सिर्फ 211 घटनाएं हुईं।
अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटने के बाद सुरक्षा बलों की सतर्कता के कारण पथराव की घटनाओं में भारी कमी आई।
यही नहीं, सुरक्षाबलों के साथ-साथ आम जनता को होने वाला नुकसान भी काफी कम हुआ है। इस दौरान मौतों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई। अनुच्छेद 370 के खात्मे के साथ भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती ने आम जनता में आत्मविश्वास भी बढाया है।
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2020 के पहले छह माह के दौरान पत्थरबाजी की घटनाओं में एक नागरिक की मौत हुई थी, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 18 और 2019 में तीन था। इसी तरह 2018 के पहले छह महीने में 549 नगारिक घायल हुए थे।
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अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटने के बाद सुरक्षा बलों की सतर्कता के कारण पथराव की घटनाओं में भारी कमी आई।
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यही नहीं, सुरक्षाबलों के साथ-साथ आम जनता को होने वाला नुकसान भी काफी कम हुआ है। इस दौरान मौतों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई। अनुच्छेद 370 के खात्मे के साथ भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती ने आम जनता में आत्मविश्वास भी बढाया है।
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2020 के पहले छह माह के दौरान पत्थरबाजी की घटनाओं में एक नागरिक की मौत हुई थी, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 18 और 2019 में तीन था। इसी तरह 2018 के पहले छह महीने में 549 नगारिक घायल हुए थे।
2019 में यह आंकड़ा 335 और इस साल 63 में ही सिमट गया। इन घटनाओं में 2018 में 78 सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे, जबकि इस वर्ष सिर्फ 14 सुरक्षाकर्मी जख्मी हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पांच अगस्त को शुरुआत में कुछ समय तक पाबंदियां लागू की गईं। बाद में 17 अगस्त से पहले लैंडलाइन टेलीफोन चालू किए गए। स्कूल-कॉलेज क्रमबद्ध ढंग से खोले गए और आम यातायात बहाल कर दिया गया।
अक्तूबर में घाटी में पोस्ट पेड मोबाइल फोन शुरू हुए और इसके बाद ब्लॉक डेवलेपमेंट काउंसिल के चुनाव कराए गए। केंद्र शासित प्रशासन ने 400 इंटरनेट कियोस्क स्थापित किए और इस साल जनवरी से 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी शुरू की हैं। इस साल मार्च में फारूक और उमर अब्दुल्ला की रिहाई के साथ पांच अगस्त के बाद पीएसए में निरुद्ध नेताओं की रिहाई प्रक्रिया भी शुरू की गई।
कश्मीर ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट की खारिज
अधिकारियों का यह बयान हाल में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, पूर्व सैनिकों और पूर्व राजनयिकों सहित बुद्धिजीवियों के एक समूह द्वारा तैयार कश्मीर ह्यूमन राइट्स नामक रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त, 2019 के बाद पूरी तरह बंदी रही। इस कारण आम लोगों को दिक्कतों का सामना करने और स्थानीय उद्योगों को काफी नुकसान हुआ। रिपोर्ट में पीएसए जैसे कानूनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया था।
अक्तूबर में घाटी में पोस्ट पेड मोबाइल फोन शुरू हुए और इसके बाद ब्लॉक डेवलेपमेंट काउंसिल के चुनाव कराए गए। केंद्र शासित प्रशासन ने 400 इंटरनेट कियोस्क स्थापित किए और इस साल जनवरी से 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी शुरू की हैं। इस साल मार्च में फारूक और उमर अब्दुल्ला की रिहाई के साथ पांच अगस्त के बाद पीएसए में निरुद्ध नेताओं की रिहाई प्रक्रिया भी शुरू की गई।
कश्मीर ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट की खारिज
अधिकारियों का यह बयान हाल में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, पूर्व सैनिकों और पूर्व राजनयिकों सहित बुद्धिजीवियों के एक समूह द्वारा तैयार कश्मीर ह्यूमन राइट्स नामक रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त, 2019 के बाद पूरी तरह बंदी रही। इस कारण आम लोगों को दिक्कतों का सामना करने और स्थानीय उद्योगों को काफी नुकसान हुआ। रिपोर्ट में पीएसए जैसे कानूनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया था।
विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने जमीनी हकीकत बताई
इस दौरान दो विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने भी जम्मू-कश्मीर का दौरा कर यहां की जमीनी हकीकत से पूरी दुनिया को रूबरू कराया। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और मध्य-पूर्व और अफ्रीकी देशों सहित कई राष्ट्रों के दूत शामिल थे।